🔊
चकबंदी लागू, लेकिन चम्पावत के किसानों तक लाभों की जानकारी पहुंचाना बड़ी चुनौती।
चम्पावत, 23 जुलाई 2026। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में खेती को व्यवस्थित और किसानों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार ने स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026 लागू की है। इसके तहत चम्पावत जिले में भी जिला स्तरीय क्रियान्वयन समिति का गठन कर दिया गया है। हालांकि, पहाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में चकबंदी के फायदे और इसकी प्रक्रिया की जानकारी अभी भी बड़ी संख्या में किसानों तक नहीं पहुंच पाई है।
पर्वतीय क्षेत्रों में खेती की एक बड़ी समस्या खेतों का बिखरा और दूर-दूर होना है। एक ही परिवार की जमीन कई अलग-अलग स्थानों पर छोटे-छोटे टुकड़ों में होने के कारण किसानों के लिए खेती करना मुश्किल हो जाता है। इससे खेती की लागत बढ़ती है, सिंचाई की सुविधा का बेहतर उपयोग नहीं हो पाता और आधुनिक कृषि मशीनों का इस्तेमाल भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। यही वजह है कि कई क्षेत्रों में कृषि और बागवानी की संभावनाओं के बावजूद जमीन का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
क्या है चकबंदी?
सरल शब्दों में चकबंदी का मतलब है कि अलग-अलग स्थानों पर बिखरी जमीन के टुकड़ों को आपसी सहमति और निर्धारित प्रक्रिया के तहत इस तरह व्यवस्थित किया जाए कि किसान की जमीन एक जगह या कम स्थानों पर अधिक सुविधाजनक रूप में आ सके। इससे खेतों तक पहुंच, सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण और भूमि प्रबंधन आसान हो सकता है।
सरकार की नीति के तहत चम्पावत जिले में स्वैच्छिक और आंशिक चकबंदी को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए किसानों की सहमति जरूरी होगी। जिले के प्रत्येक तहसील क्षेत्र में कम से कम दो विवाद रहित गांवों का चयन कर चकबंदी की प्रक्रिया शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों को मिल सकते हैं कई फायदे
चकबंदी के माध्यम से खेतों का बेहतर प्रबंधन होने पर कृषि उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के प्रभावी उपयोग, खेती की लागत कम करने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही किसानों को विभागीय योजनाओं, स्वरोजगार कार्यक्रमों, सिंचाई सुविधाओं, आदान सब्सिडी, खेतों की तारबंदी, कृषि यंत्रीकरण, पुरस्कार और अन्य विकास योजनाओं का लाभ दिलाने पर भी जोर दिया जाएगा।
असली चुनौती जागरूकता की
सरकार ने नीति लागू कर दी है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी किसानों तक पहुंचेगा जब ग्रामीणों को यह समझाया जाए कि चकबंदी क्या है, इससे उनकी जमीन पर क्या असर पड़ेगा, उन्हें क्या लाभ मिलेंगे और आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों के बीच कार्यशालाओं, गोष्ठियों और सफल उदाहरणों के माध्यम से चकबंदी के लाभों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। किसानों को निर्धारित प्रपत्र-01 के माध्यम से स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी के लिए आवेदन करने की जानकारी भी दी जाएगी।
पर्वतीय क्षेत्रों में खेती को बचाने और युवाओं को कृषि-बागवानी से जोड़ने के लिए चकबंदी को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब जरूरत इस बात की है कि नीति कागजों से निकलकर गांवों तक पहुंचे और किसानों को इसकी पूरी जानकारी सरल भाषा में दी जाए।
खबर से जुड़ी अन्य तस्वीरें: