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निलोटी की महिलाओं ने डेयरी से लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी, 7 महिलाओं की मेहनत से खड़ा हुआ सफल उद्यम।
चम्पावत, 20 अगस्त 2026। चम्पावत जिले के विकासखंड पाटी स्थित सुदूरवर्ती ग्राम निलोटी की महिलाओं ने स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से गांव की सात महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह बनाकर सामूहिक डेयरी इकाई स्थापित की है, जिससे उन्हें गांव में ही स्थायी रोजगार और सम्मानजनक आय का साधन मिला है।
पूर्व में गांव की महिलाएं सीमित संसाधनों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर पशुपालन और दुग्ध उत्पादन करती थीं। बाजार तक सीमित पहुंच और उचित आय का साधन नहीं होने के कारण उन्हें मेहनत का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता था। इसी समस्या के समाधान के लिए ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन से सात महिलाओं ने मिलकर ‘श्री भूमिया देवता स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया।
समूह ने गांव में ही सीबीओ स्तर की आधुनिक सामूहिक डेयरी इकाई स्थापित की। इस परियोजना पर कुल 10 लाख रुपये की लागत आई। इसमें ग्रामोत्थान परियोजना की ओर से 6 लाख रुपये का वित्तीय अनुदान दिया गया, जबकि 3 लाख रुपये का बैंक ऋण परियोजना के समन्वय से उपलब्ध कराया गया। शेष 1 लाख रुपये का योगदान समूह की महिला सदस्यों ने स्वयं किया।
रोजाना 45 से 50 लीटर दूध का उत्पादन
वर्तमान में डेयरी इकाई में वैज्ञानिक एवं आधुनिक प्रबंधन के तहत 7 गाय और 1 भैंस का पालन किया जा रहा है। इनसे प्रतिदिन औसतन 45 से 50 लीटर गुणवत्तापूर्ण दूध का उत्पादन हो रहा है।
समूह की महिलाएं आपसी कार्य-विभाजन के माध्यम से दुग्ध उत्पादन, संग्रहण, गुणवत्ता जांच और स्थानीय बाजार में दूध के विपणन की जिम्मेदारी स्वयं संभाल रही हैं।
हर महिला को 15 से 20 हजार रुपये मासिक आय
सामूहिक प्रयासों से डेयरी कारोबार अब महिलाओं के लिए आय का मजबूत जरिया बन गया है। समूह की प्रत्येक महिला सदस्य वर्तमान में लगभग 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही है।
इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, उद्यमशीलता और निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ी है।
निलोटी गांव की यह पहल बताती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिले तो वे स्थानीय स्तर पर ही सफल उद्यम खड़ा कर सकती हैं। महिलाओं की यह सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।