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दूध उत्पादन में चम्पावत ने बनाया नया रिकॉर्ड, आंकड़ा 21 हजार लीटर के पार
दुग्ध कारोबार बना ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार, उन्नत गायों की खरीद में बाहरी राज्यों की अनिवार्यता से पशुपालक परेशान
चम्पावत जिले में लगातार पशुपालन को बढ़ावा मिलने से दूध का उपार्जन बढ़ता जा रहा है अकेले चम्पावत दुग्ध संघ 21 हज़ार लीटर के रिकॉर्ड उत्पादन का आंकड़ा पार कर चूका है ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त माध्यम बना दूध का यह कारोबार और फलीभूत होने के अपार संभावनाएं है जब यहां जिला स्तर पर एनसीडीसी योजना के तहत उन्नत गायों की खरीद फरोक्त की व्यवस्था जिला स्तर पर की जाती बर्तमान में उत्तराखंड के सर्वाधिक दुग्ध उत्पाद में पहले पायदान में खड़े चम्पावत जिले का ही उदाहरण है यहां जर्सी कलूड की विक्री ना होने से पशुपालको के सामने गोठ गोशाला एवं उन्हें पालने की बड़ी समस्या पैदा हुयी है कई लोग इस परेशानी से इतने दुखी है उन्होंने गाय पालना ही छोड़ दिया है एनसीडीसी योजना में सामान्य , SC/ST महिलाओं को 68 .75 तथा पुरुष काश्तकारों को 45 .75 फीसदी छूट पर गंगा गाय योजना के तहत गाये उपलब्ध होती है किंतु इसमें ऐसा पेंच फॅसा दिया है की गायों को राज्य के बाहर से खरीदने की शर्त लगायी गयी है इस व्यवस्था में जो दूधारू गाय पीलीभीत में 60 हज़ार रूपये में मिलती है वही गाय चम्पावत जिले आधी कीमत में मिल जाती है जिसमे ढुलान कम होने साथ गायों में वातावरण का असर नहीं पढता है लेकिन इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किये जा रहे है चम्पावत दुग्ध संघ ने दुग्ध उपार्जन का रिकॉर्ड बना लिया है जिसमे पिछले दो सालो के दौरान तीन हज़ार लीटर की वृद्धि होने से यह आंकड़ा 21 हज़ार लीटर को पार कर चूका है जिसमे दुग्ध संघ 10 हज़ार लीटर जिले की तीन फर्मो के अलावा 4 .50 हज़ार लीटर दूध स्थानीय स्तर पर खपत कर रहा है जबकि शेष दूध फेडरेशन को दिया जा रहा है
दुग्ध संघ प्रबंधक जीएस राणा का कहना है की डेरी 46 रूपये लीटर दूध की खरीद कर उसे खुले बाजार में 50 रूपये तथा पैकिंग में 65 रूपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचा जा रहा है उनका कहना है की दूध के रेट गुडवत्ता के आधार पर होते है डेरी द्वारा दूध के बायो प्रोडक्ट दही छांछ पनीर व घी का उत्पादन कर इसके मार्केटिंग लगातार बढ़ती जा रही है चम्पावत दुग्ध संघ में आने वाला दूध पूरी तरह ऑर्गेनिक है जिसका स्वाद अपना अलग ही जायका देता है मैदानी क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादो में मिलावट की खबरों से अब लोग यहां की डेरी के उत्पाद अधिक खरीद रहे है तथा चम्पावत दुग्ध संघ ने अपने पैक्ड छांछ को कोल्ड्रिंक का एक विकल्प बनाकर उपभोक्ताओं को परोसा जो रहा है तथा इसकी हर जगह उपलब्धता भी सुनिश्चित की गयी है