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हाईकोर्ट की रोक के बाद आज फैसला लेगा निर्वाचन आयोग, आचार संहिता भी हो सकती है स्थगित
देहरादून/चंपावत, 25 जून 2025 | विशेष संवाददाता
उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर स्थिति लगातार पेचीदा होती जा रही है। हाईकोर्ट द्वारा चुनाव अधिसूचना पर रोक लगाने के आदेश के बाद अब निर्वाचन आयोग मंगलवार को इस संबंध में अपना निर्णय लेगा। यह भी संभव है कि आयोग अधिसूचना को स्थगित कर दे और इसके साथ ही प्रदेश में लागू आदर्श आचार संहिता भी निष्प्रभावी हो जाए।
राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने बताया कि अभी तक आयोग को हाईकोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन वे अधिवक्ताओं के संपर्क में हैं और आदेश मिलते ही उसी के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा।
शनिवार को जारी हुई थी अधिसूचना, सोमवार को मिली रोक
राज्य निर्वाचन आयोग ने बीते शनिवार को त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत 25 जून से नामांकन प्रक्रिया शुरू होनी थी और प्रदेश में आचार संहिता भी लागू हो गई थी। मगर सोमवार को नैनीताल हाईकोर्ट ने एक आरक्षण संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी।
सोमवार देर शाम तक निर्वाचन आयोग आदेश की प्रति मिलने की प्रतीक्षा करता रहा। अब मंगलवार को जैसे ही आदेश की कॉपी प्राप्त होगी, आयोग अपना रुख स्पष्ट करेगा।
शुरू से रही विवादों में चुनाव प्रक्रिया
पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया शुरू से ही विवादों और सवालों के घेरे में रही है। पहले चुनाव समय पर नहीं हो पाए, फिर आरक्षण की गजट अधिसूचना जारी किए बिना ही आरक्षण लागू कर दिया गया, जिससे मामला न्यायालय तक जा पहुंचा।
उत्तराखंड पंचायत संगठन के संयोजक जगत मार्तोलिया ने आरोप लगाया कि आरक्षण की प्रक्रिया संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं रही और रोस्टर व्यवस्था में गंभीर विसंगतियां की गई हैं।
विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रिया:
इंद्रेश मैखुरी, भाकपा माले प्रदेश सचिव ने कहा:
पहले अधिकारियों को प्रशासक बनाया गया, फिर निर्णय पलट कर निवर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशासक बना दिया गया। इससे शासन की अस्थिर नीति उजागर होती है।
मुरारी लाल खंडेवाल, याचिकाकर्ता ने कहा:
आरक्षण चक्रीय क्रम से हटकर लागू किया गया, जो असंवैधानिक है। मैंने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
चंद्रेश कुमार, सचिव, पंचायतीराज विभाग ने कहा:
आरक्षण नियमावली की अधिसूचना प्रक्रिया गतिमान है। इसे शीघ्र जारी कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
आगे की संभावनाएं:
जानकारों का मानना है कि अगर अदालत से रोक हट भी जाती है, तो आरक्षण को नए सिरे से लागू करना पड़ सकता है, जिससे चुनावी प्रक्रिया में और देरी संभव है। साथ ही, जिलों में आरक्षण को लेकर तीन हजार से अधिक आपत्तियां भी आई हैं, जिनका अभी तक उचित निस्तारण नहीं हो सका है।
निष्कर्ष:
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की राह अभी स्पष्ट नहीं है। अब सबकी निगाहें निर्वाचन आयोग के मंगलवार को आने वाले फैसले पर टिकी हैं। यदि आयोग अधिसूचना स्थगित करता है, तो यह पूरी चुनाव प्रक्रिया को फिर से पटरी पर लाने के लिए एक बड़ी पुनर्विचार प्रक्रिया की शुरुआत होगी।