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नेपाल में जेन ज़ी की बग़ावत: काठमांडू में कर्फ़्यू, सेना की अपील और भारत तक फैलती बेचैनी
नेपाल इस समय सबसे बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकटों में से एक से गुजर रहा है। राजधानी काठमांडू समेत कई संवेदनशील इलाक़ों में सरकार को कर्फ़्यू लगाने पर मजबूर होना पड़ा है। वजह है—जेन ज़ी पीढ़ी के हिंसक विरोध प्रदर्शन, जिसने बीते कुछ दिनों में नेपाल की सड़कों को अशांत कर दिया है।
जेन ज़ी आखिर क्यों गुस्से में?
नेपाल की नई पीढ़ी यानी जेन ज़ी (1997–2012 के बीच जन्मी पीढ़ी) खुले तौर पर मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठा रही है। बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, लोकतंत्र की धीमी रफ्तार और नेताओं की कथनी-करनी में अंतर इनके गुस्से की जड़ है। उनका कहना है कि नेपाल की राजनीति "पुराने चेहरों" में कैद है और भविष्य अंधेरे में है।
सेना की सक्रियता,-"शांति बहाली की अपील"
स्थिति बिगड़ते देख नेपाल की सेना सामने आई है। सेना प्रमुख ने जेन ज़ी के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया और अपील की कि "विरोध का रास्ता हिंसा नहीं, संवाद होना चाहिए।" हालांकि सेना की यह मध्यस्थता कितनी कारगर होगी, यह आने वाला समय बताएगा।
नेपाल का भविष्य किसके हाथों?
अब सवाल है कि आगे नेपाल किस रास्ते जाएगा?
एक ओर है जेन ज़ी, जो तेज़ बदलाव चाहती है।
दूसरी ओर है सेना, जो स्थिरता और व्यवस्था चाहती है।
विश्लेषक मानते हैं कि नेपाल का भविष्य इन्हीं दो ध्रुवों से होकर निकलेगा। अगर संवाद सफल नहीं होता तो संकट और गहरा सकता है।
क्या आग भारत तक पहुंचेगी?
भारत और नेपाल के बीच खुले बॉर्डर और गहरे सांस्कृतिक रिश्ते हैं। नेपाल की अस्थिरता का असर सीधे उत्तराखंड, बिहार और यूपी की सीमाओं तक महसूस किया जा सकता है। खासकर श्रमिक आवाजाही और सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है। यही कारण है कि भारत नेपाल की स्थिति पर बारीकी से नज़र रखे हुए है।
ट्रंप की बयानबाज़ी - भारत पर "नरम" या "गर्म"?
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोस्त बताया, लेकिन साथ ही यूरोपीय संघ (EU) से भारत पर टैरिफ लगाने की अपील भी कर डाली।
क्या यह संकेत है कि ट्रंप भारत के लिए "नरम" हैं?
या फिर "दोस्ती" के बावजूद व्यापारिक मोर्चे पर "गर्म" रुख़ बनाए रखेंगे?
निष्कर्ष
नेपाल में जेन ज़ी की बग़ावत सिर्फ़ नेपाल की राजनीति को नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। सेना और नई पीढ़ी के बीच संवाद ही नेपाल के कल का रास्ता तय करेगा। वहीं, वैश्विक स्तर पर ट्रंप के संकेत बताते हैं कि भारत को अपनी विदेश नीति और आर्थिक रणनीति को और संतुलित करना होगा।
आने वाले दिनों में नेपाल की गहमागहमी और अमेरिका-भारत संबंध दोनों ही एशिया की राजनीति के सबसे अहम मुद्दे बने रहेंगे।