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₹5 के बिस्कुट के लिए गाजा में चुकाने पड़े ₹2400: बेटी के लिए पिता की मार्मिक पोस्ट वायरल
नई दिल्ली/गाजा, 7 जून 2025:
युद्धग्रस्त गाजा पट्टी में मानवीय संकट और भुखमरी का आलम इस कदर गहराता जा रहा है कि एक बिस्कुट खरीदना भी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गया है। इस संकट की भयावहता को बयां करती एक सोशल मीडिया पोस्ट बीते दिनों दुनिया भर में वायरल हो गई है, जिसमें एक पिता ने अपनी बेटी को उसका पसंदीदा बिस्कुट दिलाने के लिए लगभग ₹2400 (24 यूरो) खर्च किए।
इस वायरल पोस्ट को मोहम्मद जावेद नाम के एक्स (पूर्व ट्विटर) यूजर ने 1 जून को साझा किया। उन्होंने लिखा,
> "लंबे इंतजार के बाद आखिरकार आज मुझे रविफ के लिए उसके पसंदीदा बिस्किट मिल गए। हालांकि कीमत 1.5 यूरो से बढ़कर 24 यूरो से भी ज्यादा हो गई। इसके बावजूद मैं रविफ को उसका पसंदीदा बिस्किट दिलाने से मना नहीं कर सका।"
पारले-जी बना जज़्बातों का प्रतीक
तस्वीर और वीडियो में जो बिस्कुट दिखाया गया है, वह भारत का लोकप्रिय ब्रांड पारले-जी है। भारत में इसकी कीमत महज ₹5 से शुरू होती है, लेकिन गाजा में यही बिस्कुट ₹2400 में मिल रहा है, जो वहां की भयावह स्थिति को उजागर करता है। भारत में पारले-जी के अलग-अलग पैक की कीमत ₹5, ₹10, ₹30 और फैमिली पैक के लिए ₹80 तक है।
गाजा में भोजन, आटा और मानवीय सहायता का अभाव
संयुक्त राष्ट्र और अन्य राहत एजेंसियों की रिपोर्टें भी गाजा के हालात की गंभीरता की पुष्टि करती हैं। ऑक्सफैम के अनुसार, 25 किलोग्राम आटे की कीमत अब 360 अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹30,000) तक पहुंच गई है। अधिकतर परिवार दिन में केवल एक बार भोजन कर पा रहे हैं, वह भी अक्सर बच्चों के लिए सुरक्षित रखा जाता है।
मानवीय संकट को दर्शाता एक पिता का प्यार
मोहम्मद जावेद की यह पोस्ट अब तक 10 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं, और यह पोस्ट इस समय गाजा की त्रासदी का मानवीय चेहरा बन गई है। यह सिर्फ एक बिस्कुट की कहानी नहीं, बल्कि युद्ध और भूख के बीच पिता के प्रेम, संघर्ष और त्याग की मार्मिक गाथा है।
सवालों के घेरे में युद्ध और दुनिया की चुप्पी
इस पोस्ट के वायरल होने के बाद एक बार फिर गाजा में पिछले 20 महीने से जारी हमास और इज़राइल संघर्ष पर वैश्विक ध्यान केंद्रित हुआ है। लाखों लोग मानवीय सहायता पर निर्भर हैं, लेकिन सहायता सीमित और बाधित हो रही है।
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निष्कर्ष:
गाजा से उठती यह एक छोटी-सी कहानी, दरअसल एक बड़े सवाल को जन्म देती है— जब युद्ध की कीमत एक बिस्कुट के लिए ₹2400 हो जाती है, तो इंसानियत की कीमत कितनी बचती है?