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नेपाल में हिंसक प्रदर्शन से सबक, आंदोलनों को बनना चाहिए अहिंसक और अनुशासित
लोकतांत्रिक व्यवस्था में आंदोलन जनता की आवाज़ को सरकार तक पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम है, लेकिन हाल ही में नेपाल में हुए जेन ज़ी के हिंसक प्रदर्शनों ने यह भी साबित कर दिया कि अगर आंदोलन अपनी सीमा लांघ जाए तो उसका स्वरूप विनाशकारी हो जाता है। नेपाल की राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में सरकारी सम्पत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया, जिसके चलते प्रशासन को कर्फ्यू तक लगाना पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आंदोलन करना बुरा नहीं, बल्कि ज़रूरी है। इसके ज़रिए नीतिगत बदलाव, सामाजिक जागरूकता और जनता की ताकत का संदेश सरकार तक पहुँचता है। लेकिन जब आंदोलन हिंसा और तोड़फोड़ में बदलते हैं तो इसका सबसे ज़्यादा नुकसान आम जनता और देश की सम्पत्ति को होता है।
अहिंसक आंदोलन ही लोकतंत्र की असली ताकत है। गांधीजी के सत्याग्रह से लेकर भारत के कई बड़े जनांदोलनों ने साबित किया है कि बिना हिंसा के भी बड़े बदलाव संभव हैं। नेपाल जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए भारत में होने वाले आंदोलनों को शांतिपूर्ण, रचनात्मक और अनुशासित रूप में चलाना समय की मांग है।