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Rojgar
**"आज मैं, चंदन सिंह बिष्ट, ग्राम कोटला का निवासी, आप सबके सामने एक बात लेकर खड़ा हूँ।
उत्तराखंड… जो कभी अपनी पवित्रता, अपनी संस्कृति और अपने स्विष्ट देवों के लिए जाना जाता था,
वो आज सिर्फ नाम भर बनकर रह गया है।
???? मैं आपसे पूछता हूँ – क्या हम अपने उत्तराखंड को सिर्फ नाम तक सीमित रहने देंगे?
आज हमारे पहाड़ बिक रहे हैं, हमारी ज़मीनें उजड़ रही हैं,
और बाहर से लोग आकर हमारे संसाधनों को निगल रहे हैं।
अगर यही हाल रहा, तो आने वाली पीढ़ियाँ न अपनी भाषा समझ पाएँगी,
न अपनी संस्कृति जान पाएँगी, और न अपने पहाड़ों से रिश्ता जोड़ पाएँगी।
???? क्या हम अपनी बोली खोना चाहते हैं?
???? क्या हम अपने पहाड़ों को खोना चाहते हैं?
तो अब समय आ गया है, कि हम सब मिलकर उत्तराखंड को उसकी असली पहचान दिलाएँ।
हमें अपनी भाषा, अपनी संस्कृति, अपने पहाड़ और अपने रोज़गार को बचाना होगा।
मैं, चंदन सिंह बिष्ट, ग्राम कोटला का निवासी, आप सबको यह याद दिलाना चाहता हूँ –
हमें अपने गाँव, अपने घर और अपनी धरती को बचाना है।