🔊
उपनल कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, पक्के होंगे 8000 से अधिक कर्मचारी।
देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी विभागों में आउटसोर्स आधार पर कार्यरत उपनल कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार जल्द ही इनके नियमितीकरण की ठोस नीति लागू कर सकती है। रिकॉर्ड के अनुसार, प्रदेश में करीब 8000 उपनल कर्मचारी ऐसे हैं जो 10 साल या उससे अधिक समय से सेवा दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उपनल कर्मचारियों को नियमित करने के लिए नीति बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। यह समिति यह तय करेगी कि नियमितीकरण के लिए कट ऑफ सेवा अवधि कितनी हो और किन पदों पर की गई नियुक्तियों को इसमें शामिल किया जाए।
समिति अब तक 4200 कर्मचारियों का ब्योरा प्राप्त कर चुकी है और शेष विभागों से जानकारी मांगी गई है। बताया जा रहा है कि समिति 10 से 20 वर्ष की सेवा अवधि और पद सृजन के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर रही है।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सरकार संविदा, दैनिक व अंशकालिक कर्मचारियों की नियमितीकरण नीति भी संशोधित कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार, संविदा कर्मचारियों के लिए सेवा अवधि को 5 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष किया जा सकता है। माना जा रहा है कि यही मानक उपनल कर्मचारियों पर भी लागू हो सकता है।
हालांकि, इसमें एक पेच यह है कि उपनल कर्मचारी आउटसोर्स माध्यम से कार्यरत हैं, जबकि संविदा कर्मचारी सीधे विभाग से जुड़े होते हैं। ऐसे में समिति सभी बिंदुओं की जांच कर रही है ताकि एक न्यायसंगत और व्यवहारिक नीति बनाई जा सके।
मुख्य बिंदु:
प्रदेश में 8000 से अधिक उपनल कर्मचारी 10+ वर्षों से कार्यरत।
मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर बनी आर.के. सुधांशु समिति नीति तैयार कर रही।
10 से 20 वर्ष की सेवा अवधि को नियमितीकरण का आधार बनाया जा सकता है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद संविदा कर्मियों की नीति भी संशोधनाधीन।