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हाईकोर्ट सख्त- उपनल कर्मियों को स्थायी न करने पर मुख्य सचिव को नोटिस
अगली सुनवाई 12 जून को, सुप्रीम कोर्ट से भी खारिज हो चुकी है राज्य सरकार की अपील
संवाददाता, नैनीताल
हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में उपनल कर्मियों को स्थायी न करने पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने मुख्य सचिव आनंद वर्धन को पक्षकार बनाते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है और पूछा है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का पालन अब तक क्यों नहीं किया गया।
यह आदेश वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने उत्तराखंड उपनल कर्मचारी संघ की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 जून के लिए तय की है और मुख्य सचिव को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।
क्या था मामला?
12 नवंबर 2018 को हाईकोर्ट ने कुंदन सिंह व अन्य उपनल कर्मचारियों की याचिका पर फैसला सुनाते हुए सरकार को निर्देश दिया था कि उपनल के माध्यम से नियुक्त सभी कर्मियों को एक वर्ष के भीतर नियमित किया जाए। साथ ही छह माह के भीतर उन्हें महंगाई भत्ते के साथ न्यूनतम वेतन देने और उनके वेतन से जीएसटी की कटौती न करने के निर्देश भी दिए गए थे।
राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने 15 अक्टूबर 2024 को राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया।
अब भी आदेशों की अवहेलना
अवमानना याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बावजूद सरकार ने हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का पालन नहीं किया। इसी को लेकर कर्मचारी संघ ने मुख्य सचिव समेत राधा रतूड़ी व दीपेंद्र चौधरी को पक्षकार बनाते हुए अवमानना याचिका दायर की थी।
एफआईआर निरस्त
इस बीच हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में रुड़की थाने में दर्ज हत्या के प्रयास की एफआईआर को आपसी समझौते के आधार पर निरस्त कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने सुनाया।