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अंकिता भंडारी हत्याकांड: अंकिता को मिला न्याय, 32 महीने बाद तीनों आरोपी दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा
कोटद्वार, 30 मई 2025।
बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में आखिरकार न्याय की गूंज सुनाई दी। कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे कोर्ट) ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों – सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता – को हत्या (धारा 302), सबूत मिटाने (धारा 201) और महिला के साथ दुर्व्यवहार (धारा 354) सहित अन्य धाराओं में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही तीनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने पीड़िता के परिजनों को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश भी दिए हैं।
क्या था मामला?
18 सितंबर, 2022 को रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या कर उसका शव श्रीनगर स्थित चीला शक्ति नहर में फेंक दिया गया था। घटना के करीब एक सप्ताह बाद अंकिता का शव बरामद हुआ, जिससे पूरे उत्तराखंड में आक्रोश फैल गया था। यह मामला उस समय तूल पकड़ गया जब यह खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी पुलकित आर्य एक पूर्व भाजपा नेता का बेटा है और पीड़िता पर 'VIP गेस्ट' को स्पेशल सर्विस देने का दबाव बनाया गया था।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, भीड़ ने बैरिकेडिंग तोड़ी
फैसले के दिन कोटद्वार न्यायालय परिसर के बाहर माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। बड़ी संख्या में लोग अदालत परिसर के बाहर न्याय की उम्मीद लिए एकत्र हुए थे। जैसे ही फैसला सुनाए जाने का समय करीब आया, भीड़ ने बैरिकेडिंग तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने बलपूर्वक रोका। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए गढ़वाल मंडल के विभिन्न जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया था।
न्याय की लड़ाई में 32 महीने
इस मामले में 30 जनवरी 2023 को पहली सुनवाई शुरू हुई थी। एसआईटी जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने अदालत में 500 पन्नों का चार्जशीट दाखिल किया। 19 मई 2025 को विशेष लोक अभियोजक अवनीश नेगी द्वारा बहस समाप्त की गई थी, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुनाने की तिथि 30 मई निर्धारित की थी।
जनभावनाओं की जीत
उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश की नजरें इस बहुचर्चित केस के फैसले पर टिकी थीं। आज का फैसला अंकिता को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। पीड़िता के परिजनों और आमजन में फैसले के बाद संतोष का भाव है, लेकिन यह भी मांग उठ रही है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोरतम कानून और तेज न्याय प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।