🔊
छात्र संघ चुनाव में छात्रों का एजेंडा साफ, कॉलेज का गौरव बढ़ाने वाला नेतृत्व, अनुशासन और बेहतर शैक्षणिक माहौल छात्रों की पहली प्राथमिकता।
लोहाघाट। स्वामी विवेकानंद राजकीय पीजी कॉलेज लोहाघाट क्षेत्र की प्रमुख शिक्षण संस्थाओं में अपनी अलग पहचान रखता है। वर्ष 1979 में स्थापित इस कॉलेज ने पांच दशक के करीब की यात्रा में शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, कर्तव्यबोध और राष्ट्र सेवा की भावना को आगे बढ़ाया है। यहां से शिक्षा प्राप्त कर अनेक छात्र शिक्षा, प्रशासन, कॉरपोरेट और विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर चुके हैं।
छात्र संघ चुनाव को लेकर इस बार छात्र मतदाताओं की अपेक्षाएं भी स्पष्ट नजर आ रही हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें ऐसा छात्र नेतृत्व चाहिए जो कॉलेज की गरिमा और प्रतिष्ठा को और मजबूत करे तथा छात्र हितों को प्राथमिकता देते हुए परिसर में स्वस्थ और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बनाए।
सबसे कम उम्र में तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त करने वाली छात्रा शांभवी मुरारी का कहना है कि छात्र प्रतिनिधि की वाणी में शालीनता, व्यवहार में अनुशासन और कुछ नया करने की क्षमता होनी चाहिए। कॉलेज प्रशासन अथवा जिला प्रशासन के साथ संवाद करते समय उसके व्यवहार से यह झलकना चाहिए कि वह स्वामी विवेकानंद पीजी कॉलेज का प्रतिनिधित्व कर रहा है।
छात्र दीपक बोरा का कहना है कि प्रतिनिधि ऐसा होना चाहिए जो कॉलेज को नए ज्ञान-विज्ञान से जोड़ने के साथ स्वयं अनुशासन में रहे और परिसर में अध्ययन का बेहतर माहौल बनाने में सहयोग करे। उनका मानना है कि कॉलेज का वातावरण ऐसा हो कि दूसरे क्षेत्रों के विद्यार्थी भी यहां प्रवेश लेने के लिए आकर्षित हों और यहां से केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार लेकर जाएं।
मुकेश कुमार ऐसे नेतृत्व की अपेक्षा रखते हैं जो स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपने आचरण में उतारे और युवाओं में समर्पण, अनुशासन तथा राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करे। वहीं तनुजा डिक्टिया का कहना है कि छात्र हित सर्वोपरि होना चाहिए। छात्र प्रतिनिधि को पूरे वर्ष विद्यार्थियों के बीच सक्रिय रहकर उनकी समस्याओं को सामने रखना चाहिए और कॉलेज के गौरव को बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए।
छात्रों का कहना है कि छात्र राजनीति केवल चुनाव और पद तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। छात्र संघ को शिक्षा, अनुशासन, रचनात्मक गतिविधियों और छात्र हितों के लिए सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। विद्यार्थियों की इच्छा है कि स्वामी विवेकानंद के नाम से जुड़े इस कॉलेज को उत्तराखंड के अग्रणी शिक्षण संस्थानों की पहली पंक्ति में खड़ा करने के लिए मिलकर प्रयास किया जाए।
इस चुनाव में प्रत्याशियों के अपने-अपने एजेंडे हो सकते हैं, लेकिन छात्र मतदाताओं की प्राथमिकता साफ है—कॉलेज का गौरव, बेहतर शिक्षा, अनुशासित नेतृत्व, स्वस्थ शैक्षणिक माहौल और छात्र हित।
फोटो: शांभवी मुरारी, दीपक बोरा, मुकेश कुमार, तनुजा डिक्टिया, प्रकृति राणा
खबर से जुड़ी अन्य तस्वीरें: