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बड़ौली-सुद्रका में सड़क कटान के बीच मिला भारी संख्या में लकड़ियों का जखीरा, जांच की मांग।
बड़ौली-सुद्रका में सड़क कटान और पेड़ कटाई का मामला गरमाया
275 मीटर सड़क कटान की जांच, वन व राजस्व विभाग की संयुक्त कार्रवाई पर ग्रामीणों की नजर
लोहाघाट। बड़ौली-सुद्रका क्षेत्र में सड़क कटान और पेड़ कटाई का मामला लगातार चर्चा में है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में फिर दोबारा सड़क निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में बांज, काफल, चीड़ और देवदार समेत अन्य पेड़ों के कटने की बात सामने आई है। मौके पर फिर जेसीबी के टायरों के निशान भी बताए जा रहे हैं।
मामले को लेकर जिलाधिकारी के निर्देश पर वन एवं राजस्व विभाग की संयुक्त जांच की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 275 मीटर सड़क कटान हुआ है, जिसमें लगभग 185 मीटर हिस्सा पक्की भूमि और करीब 90 मीटर वन भूमि से संबंधित बताया जा रहा है। हालांकि भूमि स्वामित्व और सड़क कटान की अनुमति से जुड़े तथ्यों की जांच अभी जारी है।
ग्रामीणों ने सड़क कटान के दौरान काटी गई लकड़ी का मौके पर सत्यापन कराने, जेसीबी संचालन की जांच करने तथा भूमि और अनुमति से संबंधित अभिलेखों की पड़ताल करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो और मौके पर मौजूद साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए।
ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र वन पंचायत से भी जुड़ा है और पेड़ों की कटाई से पर्यावरण तथा आसपास की जलस्रोत योजनाओं पर असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों ने पूर्व में हुई जांच और मौके पर सामने आए पेड़ों की संख्या में अंतर होने का दावा भी किया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में NGT ने भी वन भूमि और सड़क निर्माण के दौरान पर्यावरणीय नियमों के पालन पर कई मामलों में निर्देश दिए हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने स्थानीय मामले में भी सभी पर्यावरणीय और कानूनी पहलुओं की जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच में यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या विभाग को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना है।
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