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सीमांत गांवों की उपेक्षा: सुंगरखाल से लोहाघाट तक अब भी नहीं मिली रोडवेज बस, ग्रामीण परेशान
चंपावत/लोहाघाट, 7 जून 2025:
विकास खंड लोहाघाट के सीमांत गांवों — मडलक, बगोटी, सल्टा, मजपीपल, जमरसों, लेटी, सुंगरखाल आदि— की कुल जनसंख्या लगभग 8,000 से 10,000 के बीच है। नेपाल सीमा से सटे इन गांवों की प्रमुख समस्याओं में आज भी सार्वजनिक परिवहन का अभाव सबसे गंभीर मुद्दा बना हुआ है।
आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी इन गांवों को लोहाघाट से जोड़ने वाली एक भी उत्तराखंड रोडवेज बस नहीं चल पाई है, जो कि सरकारी उपेक्षा का प्रतीक बन चुका है। सुंगरखाल से लोहाघाट तक की दूरी करीब 35-40 किलोमीटर है, लेकिन इस दूरी के लिए टैक्सी चालकों द्वारा प्रति व्यक्ति ₹200 किराया वसूला जा रहा है, जो गरीब ग्रामीणों के लिए भारी आर्थिक बोझ बन चुका है।
वरिष्ठ नागरिक वंचित, योजनाएं बेअसर
उत्तराखंड सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष से ऊपर) को रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई है, परंतु इस क्षेत्र में बस न चलने के कारण यह लाभ सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है। कई बुजुर्गों को इलाज, बैंक, सरकारी कार्यों हेतु लोहाघाट जाना होता है, परंतु किराए की अनुपलब्धता के कारण वे गंभीर असुविधा झेलने को मजबूर हैं।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से अपील
स्थानीय नागरिकों ने विधायक, सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य व जिलाधिकारी से इस विषय पर त्वरित संज्ञान लेने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवहन विभाग से वार्ता कर कम से कम एक रोडवेज बस की स्थायी व्यवस्था इस रूट पर की जानी चाहिए, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके और अत्यधिक किराए से राहत मिले।
जन सहयोग की जरूरत
ग्रामीणों ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे एकजुट होकर इस जनहित के मुद्दे पर आवाज उठाएं। सामूहिक प्रयास और जन समर्थन से ही यह संभव हो पाएगा कि सरकार तक इस मांग की गूंज पहुंचे और सुंगरखाल सहित सभी सीमांत गांवों को रोडवेज बस की सौगात मिल सके।