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16 महीने में बदली अफसरशाही की कार्यसंस्कृति, जनता के दिलों में उतरे डीएम मनीष कुमार।
किसान के बेटे की सादगी और जनसेवा के जज्बे ने जीता लोगों का भरोसा, राजनीतिक आरोपों पर बुद्धिजीवियों ने जताई नाराजगी
चंपावत। मॉडल जिले के रूप में पहचान बना रहे चंपावत में जिलाधिकारी मनीष कुमार की कार्यशैली को लेकर आम जनता और बुद्धिजीवियों के बीच सकारात्मक चर्चा है। किसान परिवार से निकले इस अधिकारी की सादगी, सहज व्यवहार और जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण के प्रति प्रतिबद्धता ने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम की है। महज 16 महीने के कार्यकाल में जिलाधिकारी ने जिस सक्रियता से प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को बदलने का प्रयास किया है, उसे जिले के कई लोग राहत और भरोसे से जोड़कर देख रहे हैं।
जिलाधिकारी की कार्यशैली की खासियत यह है कि वे पद की औपचारिकता से अधिक जनसेवा को महत्व देते हैं। लंबे समय तक कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर रहने वाले लोगों की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई, अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश और मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेने की उनकी कार्यशैली ने अलग पहचान बनाई है। आम जनता के बीच उनकी साफ-सुथरी छवि और सहज उपलब्धता की चर्चा है।
हाल ही में एक राजनीतिक जनप्रतिनिधि की ओर से जिलाधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें भाजपा जिलाध्यक्ष की तरह काम करने वाला अधिकारी बताने संबंधी बयान सामने आया। इस बयान को लेकर जिले के कुछ बुद्धिजीवियों ने असहमति जताई है। उनका कहना है कि किसी अधिकारी की कार्यशैली का आकलन राजनीतिक आरोपों के बजाय उसके काम, व्यवहार और जनहित में लिए गए फैसलों के आधार पर होना चाहिए।
राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक नरेश राय का कहना है कि जनप्रतिनिधि और नौकरशाही लोकतांत्रिक व्यवस्था के दो महत्वपूर्ण अंग हैं और दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि कोई जिलाधिकारी सरकारी योजनाओं का लाभ गरीबों और जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है, तो इसे सकारात्मक रूप में देखा जाना चाहिए। इससे जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियां भी आसान होती हैं और जनता को सीधा लाभ मिलता है।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों का दायित्व सरकार की नीतियों को धरातल पर उतारने के साथ जनभावनाओं और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील रहना भी है। जिलाधिकारी मनीष कुमार की कार्यशैली में यह संवेदनशीलता दिखाई देती है। उनका मानना है कि जिले के पिछले 23 जिलाधिकारियों के कार्यकाल की तुलना में मौजूदा जिलाधिकारी ने कई मामलों में अलग छाप छोड़ने का प्रयास किया है।
आधी रात को डेंजर जोन पहुंचने की कार्यशैली ने दिलाया भरोसा
राष्ट्रसेवा के बाद समाजसेवा में सक्रिय सेवानिवृत्त कैप्टन रघुवीर सिंह का कहना है कि उनका राजनीति से कोई विशेष सरोकार नहीं है, लेकिन एक सैनिक संगठन के प्रतिनिधि के रूप में जब भी जिलाधिकारी मनीष कुमार से संवाद का अवसर मिला, उनकी कार्यशैली प्रभावित करने वाली रही। उनके अनुसार, जिलाधिकारी जनसमस्याओं को केवल फाइलों तक सीमित रखने के बजाय उनके समाधान के लिए व्यावहारिक कदम उठाने पर जोर देते हैं।
कैप्टन रघुवीर सिंह ने स्वाला डेंजर जोन का उदाहरण देते हुए कहा कि रात 12 से एक बजे के बीच जिलाधिकारी का मौके पर पहुंचना और काम में तेजी लाने के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना उनकी कार्यनिष्ठा को दर्शाता है। ऐसे प्रयासों से आम लोगों को राहत मिलती है और प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत होता है।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को भी सार्वजनिक बयान देते समय शब्दों और तथ्यों का ध्यान रखना चाहिए। लोकतंत्र में आलोचना का अपना महत्व है, लेकिन उसका उद्देश्य जनहित और व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। किसी अधिकारी पर राजनीतिक टिप्पणी करने से पहले उसके कार्यों और जनसेवा के प्रयासों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
जनता के भरोसे पर खरा उतरना ही प्रशासन की असली कसौटी
जिले के बुद्धिजीवियों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल सरकारी निर्देशों के अनुपालन तक सीमित नहीं है। जनता की समस्याओं को समझना, जरूरतमंदों को राहत पहुंचाना और प्रशासन को आम आदमी के लिए सुलभ बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
जिलाधिकारी मनीष कुमार की कार्यशैली को लेकर सामने आ रही सकारात्मक प्रतिक्रियाएं इसी अपेक्षा को रेखांकित करती हैं। हालांकि, किसी भी अधिकारी के काम का अंतिम मूल्यांकन उसके निर्णयों, उनकी निष्पक्षता और जनता को मिलने वाले वास्तविक लाभ के आधार पर ही होना चाहिए।
फोटो कैप्शन: जिलाधिकारी मनीष कुमार की कार्यशैली की सराहना करते राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक नरेश राय एवं सेवानिवृत्त कैप्टन रघुवीर सिंह।
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