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रायनगर चौड़ी गांव ने पेश की इंसानियत और भाईचारे की मिसाल, बेटी की शादी में पूरा गांव बना परिवार।
पति और इकलौते बेटे को खो चुकी दुर्गी देवी की बेटी के विवाह में ग्रामीणों ने निभाए रिश्ते, बाराती भी हुए भावुक
लोहाघाट। चम्पावत जिले के रायनगर चौड़ी गांव में सामाजिक सद्भाव, आपसी सहयोग और भाईचारे की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जो समाज के लिए प्रेरणा बन गई। गांव में किसी परिवार पर विपत्ति आती है तो ग्रामीण चाचा-चाची, ताऊ-ताई, भाई-बहन और धर्म माता-पिता बनकर उसके साथ खड़े हो जाते हैं। यहां रिश्ते केवल नाम के नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और संवेदना के साथ निभाए जाते हैं।
गांव की देवकी देवी उर्फ दुर्गी के जीवन में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उन्होंने जवानी में ही अपने पति को खो दिया। इसके बाद इकलौते बेटे की मृत्यु ने उनके जीवन को गहरे दुख में डुबो दिया। ऐसे कठिन समय में गांव के लोगों ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा और विभिन्न रिश्तों के रूप में उनका सहारा बने।
विजयादशमी के दिन दुर्गी देवी की बेटी पूजा का विवाह था। इस मौके पर ग्रामीणों ने सामूहिक जिम्मेदारी निभाते हुए विवाह की व्यवस्थाओं में पूरा सहयोग किया। गांव के लोगों ने इस तरह परिवार का साथ दिया कि विवाह की पूरी प्रक्रिया सहजता से संपन्न हो गई। ग्रामीणों की एकजुटता और अपनत्व देखकर बाराती भी आश्चर्यचकित रह गए। वे इस गांव से केवल विवाह की यादें ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे की प्रेरक मिसाल भी लेकर लौटे।
रायनगर चौड़ी गांव में उम्र के अनुसार बड़ों का सम्मान और सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देने की परंपरा रही है। गांव के शिक्षाविद् नाथूराम राय, राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित शिक्षक नरेश राय और सामाजिक कार्यकर्ता भैरव राय के आह्वान पर ग्रामीण एकजुट होकर सामाजिक कार्यों में भागीदारी निभाते हैं।
गांव की एक विशेष पहचान यह भी है कि यहां शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यक्रमों में शराब से दूरी बनाए रखने की परंपरा को महत्व दिया जाता है। ग्रामीणों का आपसी सहयोग और सामाजिक सद्भाव आसपास के गांवों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
पुराणों के मर्मज्ञ आचार्य प्रकाश कृष्ण शास्त्री के अनुसार, रायनगर चौड़ी उत्तराखंड के लिए एक आदर्श गांव का उदाहरण है। यहां की जीवनशैली, सामूहिक सोच और एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता इसे विशिष्ट बनाती है। गांव में किसी व्यक्ति के सुख-दुख को सामूहिक जिम्मेदारी मानकर उसका साथ दिया जाता है।
रायनगर चौड़ी की यह कहानी बताती है कि परिवार केवल खून के रिश्तों से नहीं बनता, बल्कि प्रेम, विश्वास और जरूरत के समय साथ खड़े होने से भी बनता है। दुर्गी देवी की बेटी पूजा के विवाह में ग्रामीणों की भागीदारी ने साबित कर दिया कि जब पूरा गांव परिवार बन जाए, तो कठिन से कठिन परिस्थिति में भी उम्मीद की नई राह निकल सकती है।
फोटो कैप्शन: पिता और भाई को खोने वाली पूजा के विवाह में सहयोग के लिए एकजुट हुए रायनगर चौड़ी गांव के ग्रामीण।