🔊
बड़ी खबर: बिहार में एनडीए की प्रचंड बढ़त, महागठबंधन ध्वस्त - नीतीश कुमार का अनुभव और मोदी फैक्टर भारी
बिहार विधानसभा चुनाव के ताज़ा रुझानों ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर स्पष्ट कर दिया है। एनडीए 188 सीटों की विशाल बढ़त के साथ सत्ता की ओर बढ़ रहा है, जबकि महागठबंधन ऐतिहासिक गिरावट झेलता दिख रहा है। चुनावी समीकरण पूरी तरह एनडीए के पक्ष में झुकते नजर आ रहे हैं।
एनडीए का तूफ़ानी प्रदर्शन
नवीनतम रुझानों के मुताबिक:
एनडीए: 188 सीटें (63 का भारी फायदा)
भाजपा-जदयू गठबंधन का यह प्रदर्शन 2020 के मुकाबले और अधिक मजबूत साबित हो रहा है।
नीतीश कुमार का अनुभव, भाजपा की रणनीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जनता का विश्वास एनडीए को नई ऊंचाइयों पर ले गया है।
महागठबंधन की करारी हार
महागठबंधन: सिर्फ 51 सीटें (59 सीटों का नुकसान)
तेजस्वी यादव की कोशिशों के बावजूद राजद-कांग्रेस गठबंधन पिछड़ता गया।
इस चुनाव में जनता ने महागठबंधन के नेतृत्व पर कम भरोसा जताया है।
जनसुराज और अन्य दलों की स्थिति
जनसुराज: 0 सीट, कोई बढ़त नहीं
अन्य दल: 4 सीटें, 2020 की तुलना में 4 सीटों की गिरावट
तीसरा मोर्चा बनने के प्रयास वोटों में तब्दील नहीं हो सके।
मोदी फैक्टर और विकास आधारित राजनीति भारी
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
जनता का जितना विश्वास प्रधानमंत्री मोदी में है, उतना किसी नेता में नहीं। बिहार के रुझान जनता की इच्छा को साफ दिखा रहे हैं।
यह बयान स्पष्ट करता है कि मोदी फैक्टर इस चुनाव का निर्णायक तत्व बना हुआ है।
राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश
नीतीश कुमार की स्वीकार्यता अब भी कायम
भाजपा के संगठन और बूथ प्रबंधन का असर
युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों का एनडीए की ओर झुकाव
महागठबंधन का जातीय समीकरण इस बार नहीं चला
निष्कर्ष
बिहार में एनडीए की ऐतिहासिक वापसी और महागठबंधन की गिरावट आने वाले वर्षों की राज्य राजनीति को नई दिशा देने वाली है।
अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो बिहार में एक बार फिर मोदी-नीतीश युग की मजबूती देखी जाएगी।