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झंगोरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹5250 प्रति कुंतल, पारंपरिक मिलेट फसलों को मिलेगा बढ़ावा
चम्पावत, 19 सितम्बर 2026। प्रदेश में पारंपरिक मिलेट फसलों के संरक्षण और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में शासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए झंगोरा (सांवा/मादिरा) का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹5250 प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है। राज्यपाल की ओर से भी इस निर्णय को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि इस निर्णय का उद्देश्य किसानों के आर्थिक हितों को सुरक्षित करने के साथ ही प्रदेश में पारंपरिक मिलेट यानी मोटे अनाजों के उत्पादन, संरक्षण और विपणन को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार की प्राथमिक नीतियों के अनुरूप झंगोरा को समर्थन मूल्य के दायरे में लाने से पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक मोटे अनाजों की खेती को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
झंगोरा पौष्टिक गुणों से भरपूर पारंपरिक अनाज है। इसे न्यूनतम समर्थन मूल्य के दायरे में लाने से पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में भी इसका उपयोग बढ़ाया जा सकेगा। शिक्षा विभाग की मिड-डे-मील योजना तथा खाद्य विभाग की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से झंगोरा के वितरण में भी सुविधा होगी, जिससे बच्चों और आमजन को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि लाभान्वित किसानों को NPCI के साथ समन्वय स्थापित करते हुए आधार इनेबल्ड सिस्टम (Aadhaar Enabled System) अथवा CBDC के माध्यम से प्रत्यक्ष भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इससे समर्थन मूल्य की धनराशि पारदर्शी तरीके से सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा सकेगी।