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अपराध का स्वरूप बदला, कानून हुआ और सख्त; बेटियां डरें नहीं, आवाज उठाएं: कुसुम कंडवाल
टनकपुर, चम्पावत, 19 सितम्बर 2026। राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की ओर से डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान, टनकपुर में स्टॉकिंग एवं साइबर स्टॉकिंग की रोकथाम को लेकर एक दिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि यह आयोजन नारी सुरक्षा, सम्मान और डिजिटल जागरूकता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि तकनीक के विस्तार के साथ अपराध का स्वरूप भी बदला है। पहले पीछा गलियों में होता था, अब मोबाइल स्क्रीन पर किया जाता है और फर्जी प्रोफाइल के जरिए धमकियां या उत्पीड़न किया जा सकता है।
उन्होंने छात्राओं और महिलाओं से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के उत्पीड़न से डरें नहीं और समय रहते आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि न्याय की दिशा में पहला कदम डरना नहीं, बल्कि अपनी बात सामने रखना है।
कुसुम कंडवाल ने केंद्र एवं राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिला आयोग पीड़ित महिलाओं और बेटियों को आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
संस्थान के निदेशक प्रो. हरिद्वारी लाल मंडोरिया ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन साइबर स्टॉकिंग और निजता का उल्लंघन गंभीर चुनौतियां भी हैं। उन्होंने युवाओं से तकनीक का उपयोग ज्ञान, नवाचार और सकारात्मक कार्यों के लिए करने की अपील की।
कार्यक्रम में राज्य मंत्री किरन देवी एवं राज्य मंत्री हेमा जोशी ने भी कार्यशाला की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र की छात्राओं को साइबर सुरक्षा, कानूनी अधिकारों और डिजिटल सतर्कता की जानकारी देना समय की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों ने बताए साइबर सुरक्षा के उपाय
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में पुलिस उपनिरीक्षक कमलेश भट्ट ने स्टॉकिंग और साइबर स्टॉकिंग के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, अनचाही ऑनलाइन ट्रैकिंग, सोशल मीडिया फ्रॉड तथा साइबर सेल और हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया समझाई।
उप जिला चिकित्सालय टनकपुर की सर्जन डॉ. प्रभा जोशी ने साइबर उत्पीड़न और सोशल मीडिया के दबाव से होने वाले मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद जैसे प्रभावों पर जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल डिटॉक्स और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी।
महिला हेल्पलाइन प्रभारी उपनिरीक्षक सिमरन ने सोशल मीडिया पर निजी जानकारी, फोटो, लोकेशन और पासवर्ड सुरक्षित रखने के व्यावहारिक उपाय बताए। उन्होंने प्राइवेसी सेटिंग्स और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के इस्तेमाल पर भी जोर दिया।
वन स्टॉप सेंटर, चम्पावत की केंद्र प्रशासिका एवं अधिवक्ता ऋतु सिंह ने महिलाओं को उपलब्ध कानूनी सहायता, साइबर अपराध से जुड़े प्रावधानों और शिकायत प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से महिलाओं को उपलब्ध चिकित्सा, कानूनी, आश्रय और मनोवैज्ञानिक सहायता के बारे में भी बताया।
कार्यक्रम के अंत में उपाध्यक्ष सायरा बानो ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर महिला आयोग की अध्यक्ष द्वारा लाभार्थियों को महालक्ष्मी किट भी वितरित की गई।
कार्यशाला में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग सदस्य रचना जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रकाश बृजवाल, निजी सचिव आधार वर्मा, रुचि धस्माना, दीपा जोशी, सुनीता मुरारी, बबीता गोस्वामी, तुलसी कुंवर, रीता कुलकोड़िया, सरोज चंद, बाल विकास परियोजना अधिकारी राजेंद्र बिष्ट एवं मोहन बिष्ट सहित संस्थान के शिक्षक, पुलिस-प्रशासन के अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं।
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