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देववाणी संस्कृत को नई उड़ान, उत्तराखंड में खुलेंगे चार वेद अध्ययन केंद्र।
हर जिले में बनेगा सांस्कृतिक ग्राम, 1,500 पांडुलिपियां संग्रहित; 23 सितंबर से शुरू होंगी संस्कृत प्रतियोगिताएं।
चंपावत। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव पद पर संस्कृत भाषा के लिए जीवन समर्पित करने वाले डॉ. विनय विद्यालंकार के आने के बाद देववाणी संस्कृत को नई दिशा देने की कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशन में संस्कृत को घर-घर तक पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम किया जा रहा है। डॉ. विद्यालंकार ने बताया कि दो माह के भीतर प्रदेश में चार वेद अध्ययन केंद्र खोलने का निर्णय लिया गया है। इनमें दो कुमाऊं और दो गढ़वाल मंडल में स्थापित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का मानना है कि देववाणी संस्कृत का किसी अन्य भाषा से कोई बैर नहीं है। संस्कृत को जितनी मजबूती मिलेगी, उतनी ही हमारी संस्कृति और सनातन परंपराओं को नई गहराई मिलेगी। खटीमा के नगला तराई में थारू जनजाति की महिलाओं द्वारा संस्कृत में संवाद किया जाना इसके विस्तार का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देववाणी संस्कृत हिमालय से निकलने वाली उस नदी की तरह है, जो अपनी राह बनाते हुए समुद्र तक पहुंचती है।
डॉ. विद्यालंकार के अनुसार मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशन में उत्तराखंड के प्रत्येक जिले में एक-एक सांस्कृतिक ग्राम स्थापित किया जाएगा। लोक कलाकारों के माध्यम से संस्कृत को बोलचाल और व्यवहार का हिस्सा बनाने का प्रयास होगा। संस्कृत के विद्वानों को सम्मानित करने के साथ भाषा के प्रचार-प्रसार में जुटी महिलाओं को भी सम्मान दिया जाएगा। अल्पसंख्यक विद्यालयों में भी संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के महान ऋषि-मुनियों की बहुमूल्य विरासत से जुड़ी पांडुलिपियों का संग्रह किया जा रहा है। अब तक करीब 1,500 पांडुलिपियां संग्रहित की जा चुकी हैं। परीक्षण के बाद इनका प्रकाशन कराया जाएगा। डॉ. विद्यालंकार का कहना है कि संस्कृत भाषा संस्कारों की जननी है। संस्कृत के श्लोक और ऋचाएं पारिवारिक वातावरण को भी प्रभावित करती हैं। जिस घर में गीता पाठ और संस्कृत के श्लोकों का उच्चारण होता है, वहां आचार, विचार और संस्कारों को मजबूती मिलती है।
उन्होंने बताया कि संस्कृत अकादमी की ओर से प्रदेशभर में संस्कृत भाषा की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं। करीब 60 हजार छात्र-छात्राएं इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे। 23 और 24 सितंबर को ब्लॉक स्तर, 7 और 8 अक्टूबर को जिला स्तर तथा 23 और 24 नवंबर को राज्य स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इस बार निजी विद्यालयों के शिक्षकों को भी संयोजक बनाकर वहां के छात्र-छात्राओं को प्रतियोगिताओं में शामिल किया जा रहा है।
फोटो : उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. विनय विद्यालंकार।