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जंगलों की आग पर कार्यशाला, जंगलों की आग से सिमट रहे वन, बचाव के लिए विभागों को एकजुट होने की जरूरत।
जंगलों की आग पर कार्यशाला
जंगलों की आग से सिमट रहे वन, बचाव के लिए विभागों को एकजुट होने की जरूरत।
वन धान-गेहूं की फसल नहीं, पीढ़ियों में तैयार होने वाली विरासत हैं : डॉ. ओमप्रकाश
लोहाघाट। ब्लॉक सभागार पाटी में उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी के तत्वावधान में जंगलों को आग से बचाने और वनाग्नि की घटनाओं को न्यूनतम करने के उद्देश्य से कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का शुभारंभ तहसीलदार चंद्र सिंह ने किया। इसमें राजस्व निरीक्षकों, पंचायत अधिकारियों, ग्राम विकास अधिकारियों, अग्निशमन एवं चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों को वनाग्नि से निपटने और आपात स्थिति में प्रभावी कार्रवाई का प्रशिक्षण दिया गया।
अकादमी के एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रभारी आपदा प्रबंधन डॉ. ओमप्रकाश ने कहा कि वन हमारे पूर्वजों की ऐसी विरासत हैं, जिन्हें पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि वन धान और गेहूं की फसल नहीं हैं, जिन्हें एक साल में तैयार किया जा सके। एक जंगल को अस्तित्व में आने में कई पीढ़ियां गुजर जाती हैं। ऐसे में जंगलों में लगने वाली आग से होने वाला नुकसान केवल वर्तमान का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र लगातार प्रभावित हो रहा है और इसका सीधा असर पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ रहा है। जलस्रोतों के सूखने और पेयजल संकट जैसी समस्याएं भी पर्यावरण में हो रहे बदलाव की गंभीरता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि वनाग्नि पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो हरित जंगलों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
डॉ. ओमप्रकाश ने कहा कि आम जनता से सीधे जुड़े विभाग वनाग्नि की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राजस्व, पंचायत, ग्राम विकास, अग्निशमन और स्वास्थ्य विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें तो आग की घटनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
फायर स्टेशन के सुनील जोशी ने जंगलों में लापरवाही से आग लगने के विभिन्न कारणों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी सावधानी बरतकर बड़ी घटनाओं को टाला जा सकता है। चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीषा ने आपात स्थिति में मानव जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से आपदा के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
इस अवसर पर बीडीओ जगदीश कार्की सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यशाला का संचालन डॉ. ओमप्रकाश ने किया।
फोटो : पाटी ब्लॉक सभागार में जंगलों की आग को न्यूनतम करने के लिए आयोजित कार्यशाला में जानकारी देते उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी के अधिकारी।