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बड़ी खबर | गंगोलीहाट में जल संकट गहराया जल जीवन मिशन की सुस्त कार्यशैली और कागजी दावों ने बढ़ाई मुश्किलें।
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़):
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत गंगोलीहाट क्षेत्र में सवालों के घेरे में है। रामेश्वर से बेलपट्टी चहज़ तक संचालित पंपिंग योजना वर्ष 2021-22 से निर्माणाधीन है, लेकिन चार साल बाद भी यह परियोजना अधूरी पड़ी है। देरी, लापरवाही और कथित अनियमितताओं ने इसे ग्रामीणों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बना दिया है।
कागजों में पूरी, जमीन पर अधूरी योजना
परियोजना का सबसे अधिक असर ग्राम सभा पिप्ली निगल्टी के तोक कफलना में देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने कई घरों तक पाइपलाइन तो बिछा दी, लेकिन उनमें पानी की आपूर्ति आज तक शुरू नहीं हो पाई।
फाइलों में काम पूरा, लेकिन हकीकत में एक बूंद पानी नहीं।
25–30 परिवारों पर संकट
कफलना के करीब 25 से 30 परिवार आज भी मूलभूत सुविधा-पेयजल- से वंचित हैं।
गर्मियों में स्थिति और गंभीर
पारंपरिक स्रोत (नौले-धारे) सूखने की कगार पर
मजबूरी में निजी वाहनों से पानी मंगवाना पड़ रहा है
इससे ग्रामीणों पर आर्थिक बोझ भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
शिकायतें, लेकिन समाधान नहीं
ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अधिकारियों और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ एक ही जवाब मिला-
कार्य प्रगति पर है
लोगों का कहना है कि यह जवाब उनकी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि उपेक्षा का प्रतीक बन चुका है।
आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय ग्रामीण-जितेंद्र बूँगला, सोनू बूँगला, नरेंद्र सिंह, प्रकाश सिंह, राहुल सिंह, रुपेश जोशी, संतोष जोशी और बॉबी बूँगला-ने सरकार से मांग की है:
योजना की निष्पक्ष जांच हो
जल्द से जल्द पेयजल आपूर्ति बहाल की जाए
चेतावनी: अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
निष्कर्ष:
सरकार की बड़ी योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। गंगोलीहाट का यह उदाहरण बताता है कि कागजी उपलब्धियों और जमीनी हकीकत के बीच अभी भी बड़ा अंतर है।