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आधुनिक औद्यानिकी से बदली खेती की तस्वीर, लोहाघाट के रघुवरदत्त मुरारी बने मिसाल
आधुनिक औद्यानिकी से बदली खेती की तस्वीर, लोहाघाट के रघुवरदत्त मुरारी बने मिसाल
चम्पावत, 12 सितंबर 2026। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर पर्वतीय क्षेत्र में खेती को आय का मजबूत जरिया बनाया जा सकता है। विकासखंड लोहाघाट के ग्राम भेंटी, ग्राम सभा डूंगरी फर्त्याल निवासी प्रगतिशील कृषक रघुवरदत्त मुरारी ने आधुनिक औद्यानिकी को अपनाकर इसका उदाहरण प्रस्तुत किया है।
लखनऊ विश्वविद्यालय से परास्नातक रघुवरदत्त मुरारी को खेती की प्रेरणा अपने पिता धर्मानंद मुरारी से मिली। पिता को खेती करते देखकर कृषि एवं उद्यानिकी के प्रति उनकी रुचि बढ़ी और उन्होंने आधुनिक तकनीकों के साथ खेती को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
वर्तमान में रघुवरदत्त के पास करीब 633 वर्गमीटर क्षेत्रफल में चार पॉलीहाउस हैं। इनमें ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक के माध्यम से शिमला मिर्च, टमाटर, खीरा समेत विभिन्न सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से उन्होंने अलग-अलग वर्षों में शिमला मिर्च और टमाटर का अच्छा उत्पादन प्राप्त किया है।
सब्जी उत्पादन के साथ उन्होंने फल उत्पादन को भी अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। उद्यान विभाग के सहयोग से करीब 60 सेब के पौधे लगाए गए हैं, जबकि लगभग 10 नाली क्षेत्र में कीवी की बागवानी विकसित की गई है। कीवी के पौधों में फलन भी शुरू हो चुका है। इसके अलावा वर्ष 2025-26 में करीब ढाई नाली क्षेत्र में एम-9 सेब का रोपण किया गया है।
रघुवरदत्त ने आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन भी शुरू किया है। इसमें आधुनिक मधुमक्खी बक्सों के साथ पारंपरिक तरीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही गोबर और केंचुओं की सहायता से वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर खेतों और बागानों में इसका उपयोग किया जा रहा है।
उद्यान विभाग की ओर से समय-समय पर उपलब्ध कराए गए पौध, बीज, ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और तकनीकी सहयोग से उनकी औद्यानिकी गतिविधियों को मजबूती मिली है। वर्ष 2025-26 में 'किसान की कहानी, किसान की जुबानी' अभियान के तहत उनके खेत पर कृषक भ्रमण और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इससे क्षेत्र के अन्य किसानों को आधुनिक औद्यानिकी और वैज्ञानिक खेती अपनाने की प्रेरणा मिली।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि जनपद की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां फल एवं सब्जी उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक उद्यानिकी, पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई, फल उत्पादन, मधुमक्खी पालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आजीविका को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने संबंधित विभागों को पात्र किसानों तक योजनाओं और तकनीकी सहयोग का अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
रघुवरदत्त मुरारी की सफलता बताती है कि शिक्षा से मिली आधुनिक सोच, परिवार से मिली खेती की प्रेरणा और वैज्ञानिक तकनीकों के समन्वय से पर्वतीय क्षेत्रों में खेती को बेहतर आजीविका और आय का मजबूत माध्यम बनाया जा सकता है।
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