🔊
रक्षाबंधन पर सीमांत गांवों को मिला शिक्षा का अनमोल उपहार, महिलाओं ने मुख्यमंत्री को दिया आशीर्वाद।
डूंगरालेटी समेत दर्जनों गांवों की वर्षों पुरानी जीआईसी की मांग हुई पूरी, ग्रामीणों ने सीएम पुष्कर सिंह धामी और डीएम मनीष कुमार का जताया आभार।
लोहाघाट। नेपाल सीमा से सटे डूंगरालेटी, जमर्सों, खाली, बगोटी, सलटा, बसौटा, सुल्ला और पासम समेत दर्जनों गांवों के लिए इस बार रक्षाबंधन का पर्व बेहद खास रहा। वर्षों से क्षेत्र में राजकीय इंटर कॉलेज खोलने की मांग आखिरकार पूरी होने पर सीमांत क्षेत्र की महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिलाधिकारी मनीष कुमार के प्रति आभार जताते हुए इसे रक्षाबंधन का अनमोल उपहार बताया।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि जिस तरह भाई रक्षाबंधन पर अपनी बहनों की खुशियों और भविष्य की कामना करता है, उसी तरह मुख्यमंत्री ने सीमांत क्षेत्र के बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए जीआईसी की सौगात देकर भाई का फर्ज निभाया है। महिलाओं ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को अपना आशीर्वाद देते हुए उनके प्रयासों के लिए दिल से कृतज्ञता व्यक्त की। जीवन के 85 बसंत देख चुके लक्ष्मी दत्त पांडे, शेर सिंह, भागीरथी देवी और जानकी देवी ने भावुक होते हुए कहा कि वे तो शिक्षा की इस सुविधा का लाभ नहीं ले सके, लेकिन अब उनके बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा के नए द्वार खुल गए हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के बच्चों के भविष्य के लिए उठाया गया यह कदम हमेशा याद रखा जाएगा। स्थानीय लोगों के अनुसार, इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए यहां के छात्र-छात्राओं को करीब 20 किलोमीटर दूर जीआईसी मडलक जाना पड़ता था। लंबी दूरी और आवागमन की परेशानी के चलते विशेषकर कई बालिकाएं हाईस्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाती थीं। ऐसे में क्षेत्र में राजकीय इंटर कॉलेज खुलने से बच्चों को घर के नजदीक ही उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण पांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सीमांत क्षेत्र के लोगों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा कर ऐसा उपहार दिया है, जिसे क्षेत्रवासी कभी नहीं भूलेंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल विद्यालय की स्थापना नहीं, बल्कि सीमांत गांवों के बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव है।
फोटो :राजकीय इंटर कॉलेज की सौगात मिलने की खुशी में सीमांत क्षेत्र की महिलाएं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिलाधिकारी मनीष कुमार के प्रति आभार जताते हुए आशीर्वाद देती हुईं।