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संघर्ष से सफलता तक: चम्पावत की रेशमा देवी बनीं महिला स्वावलंबन की मिसाल
चम्पावत, 01 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘सशक्त नारी, समृद्ध राज्य’ के विजन को चम्पावत की रेशमा देवी अपने संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास से धरातल पर साकार कर रही हैं। फागपुर गांव निवासी रेशमा देवी आज ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बन गई हैं।
एकल महिला के रूप में चार बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी संभाल रहीं रेशमा देवी ने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। 15 जुलाई 2017 को उन्होंने गांव की महिलाओं के साथ मिलकर ‘जागृति महिला स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया और समूह की अध्यक्ष चुनी गईं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ने के बाद उन्होंने कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त कर वैज्ञानिक तरीके से साबुन निर्माण सीखा। समूह को मिले 50 हजार रुपये के बैंक क्रेडिट लिंकेज (CCL) ऋण की मदद से उन्होंने साबुन और अचार निर्माण का काम शुरू किया।
स्थानीय बाजार के साथ ही सरकारी सरस मेलों में उनके उत्पादों की मांग बढ़ी, जिससे समूह की आय में इजाफा हुआ। रेशमा देवी ने स्वयं आगे बढ़ने के साथ 10 अन्य महिलाओं को अचार निर्माण का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा।
🐄 पशुपालन से बढ़ाई आमदनी
आजीविका को मजबूत करने के लिए रेशमा देवी ने पशुपालन भी शुरू किया। वर्तमान में चार गायों से प्रतिदिन करीब 12 लीटर दूध का उत्पादन कर वह बाजार में दूध बेच रही हैं।
उनकी मेहनत और कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें NRLM के तहत ‘बैंक सखी’ की जिम्मेदारी भी मिली है। इस भूमिका के माध्यम से वह ग्रामीण क्षेत्र में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने का कार्य कर रही हैं।
आज रेशमा देवी विभिन्न आजीविका गतिविधियों से करीब 25 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर अपने चार बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
रेशमा देवी की कहानी बताती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, मेहनत और दृढ़ संकल्प मिलकर मुश्किल परिस्थितियों को भी अवसर में बदल सकते हैं। उनकी सफलता चम्पावत ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है।