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जल संस्थान के राजकीयकरण की मांग पर सीएम धामी का भरोसा, डिप्लोमा इंजीनियरों में जगी उम्मीद।
मुख्यमंत्री ने कहा-मामला संज्ञान में, जल्द पूरी होगी मांग; प्रांतीय पदाधिकारियों ने सौंपा ज्ञापन।
चंपावत। उत्तराखंड जल संस्थान के राजकीयकरण की एक सूत्री मांग को लेकर जल संस्थान डिप्लोमा इंजीनियर संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद संगठन के पदाधिकारी पहली बार संतुष्ट और उत्साहित नजर आए।
संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष इंजीनियर पंकज उपाध्याय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बहादुर सिंह और उपाध्यक्ष परमानंद पुनेठा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष जल संस्थान के राजकीयकरण का मुद्दा प्रमुखता से रखा। पदाधिकारियों ने कहा कि हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड को छोड़कर अन्य राज्यों में जल संस्थानों का राजकीयकरण किया जा चुका है। ऐसे में उत्तराखंड जल संस्थान को भी राजकीय विभाग का दर्जा दिया जाना चाहिए।
संगठन ने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्तमान व्यवस्था में जल संस्थान के कर्मचारी घर-घर जाकर पेयजल बिलों की वसूली करते हैं और संस्थान के राजस्व से ही कर्मचारियों के वेतन एवं अन्य सुविधाओं की व्यवस्था होती है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि राजकीयकरण होने से कर्मचारियों को अधिक स्थायी और बेहतर सेवा सुविधाएं मिल सकेंगी।
पदाधिकारियों ने बताया कि 24 अगस्त को विभागीय सचिव शैलेश बगोली को दिए गए ज्ञापन में भी इस मांग को प्रमुखता से उठाया गया था। संगठन को जानकारी दी गई थी कि राजकीयकरण की प्रक्रिया में वित्त एवं कार्मिक विभाग की कोई आपत्तियां सामने नहीं आई हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनते हुए कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और इस दिशा में सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि वह दिन दूर नहीं, जब उत्तराखंड जल संस्थान का भी अन्य हिमालयी राज्यों की तर्ज पर राजकीयकरण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि लंबे समय से उठाई जा रही उनकी मांग को अब सरकार के शीर्ष स्तर पर गंभीरता से सुना गया है। इससे कर्मचारियों में उम्मीद जगी है कि उनकी एक सूत्री मांग जल्द पूरी होगी।
फोटो : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन सौंपते जल संस्थान डिप्लोमा इंजीनियर संगठन के प्रांतीय पदाधिकारी।