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गूंम-गरसाड़ी में शिक्षा की ऐसी अलख, 60 से 80 फीसदी घरों से निकले शिक्षक।
नेवी की नौकरी छोड़ पंडित जगन्नाथ गहतोड़ी ने 1962 में रखी थी शिक्षा की नींव, अब जीआईसी के नाम से जुड़ सकता है उनका नाम
चंपावत। पाटी विकासखंड के गूंम और गरसाड़ी गांवों ने शिक्षा के क्षेत्र में जिले ही नहीं, पूरे पहाड़ में अलग पहचान बनाई है। गूंम में करीब 60 फीसदी और गरसाड़ी में 80 फीसदी लोग शिक्षक हैं। इन गांवों की कई पीढ़ियों ने शिक्षक बनकर दूर-दराज के क्षेत्रों में शिक्षा की लौ जलाने का काम किया है। इस शैक्षिक परंपरा की नींव रखने वालों में पंडित जगन्नाथ गहतोड़ी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
वर्ष 1962 में जब क्षेत्र में शिक्षा के पर्याप्त साधन नहीं थे, तब पंडित जगन्नाथ गहतोड़ी ने नेवी की नौकरी छोड़कर क्षेत्र के बच्चों को शिक्षित करने का संकल्प लिया। उन्होंने गरसाड़ी गांव में महात्मा गांधी जूनियर हाईस्कूल की स्थापना की। प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक प्रेम बल्लभ गहतोड़ी ‘पंडित जी’ और प्रेम बल्लभ बिष्ट ‘शास्त्री जी’ ने भी इस अभियान में उनका सहयोग किया।
क्षेत्र में शिक्षा की बढ़ती जरूरत और लोगों की रुचि के चलते विद्यालय लगातार आगे बढ़ता गया। वर्ष 1978 में इसे राजकीय हाईस्कूल और वर्ष 1992 में राजकीय इंटर कॉलेज का दर्जा मिला। विद्यालय को शैक्षिक रूप से मजबूत बनाने में प्रेम बल्लभ गहतोड़ी, एनडी गहतोड़ी, भागीरथ गहतोड़ी, परमानंद जोशी, कनारी के त्रिलोचन उपाध्याय, प्रयाग गहतोड़ी और प्रयाग दत्त गहतोड़ी समेत कई शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आज गूंम और गरसाड़ी की पहचान ही शिक्षक गांवों के रूप में बन चुकी है। यहां के लोगों का कहना है कि क्षेत्र में शिक्षा का जो माहौल आज दिखाई देता है, उसकी बुनियाद दशकों पहले रखी गई थी।
आज भी याद किए जाते हैं संस्थापक_
पंडित जगन्नाथ गहतोड़ी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन क्षेत्र के लोगों के बीच उनके योगदान की चर्चा आज भी होती है। उनके परिवार की ओर से भी क्षेत्र के लोगों के साथ सामाजिक सरोकार बनाए रखने की परंपरा जारी है। उनके अधिवक्ता पुत्र शंकर गहतोड़ी और पौत्र विजय गहतोड़ी दिल्ली के सर्वोच्च न्यायालय में वकालत करते हुए क्षेत्र के लोगों की निशुल्क पैरवी करते आ रहे हैं।
जीआईसी के नाम में जुड़े संस्थापक का नाम_
क्षेत्रवासियों ने राजकीय इंटर कॉलेज गरसाड़ी का नाम पंडित जगन्नाथ गहतोड़ी के नाम पर रखने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जिस व्यक्ति ने अपनी नौकरी छोड़कर क्षेत्र में शिक्षा की नींव रखी, उसके योगदान को विद्यालय के नाम से स्थायी पहचान मिलनी चाहिए।
डीएम ने दिया नाम जोड़ने का भरोसा_
शिक्षक दिवस पर जिलाधिकारी मनीष कुमार ने पंडित जगन्नाथ गहतोड़ी के योगदान को याद करते हुए कहा कि जीआईसी गरसाड़ी के नाम के साथ पंडित जगन्नाथ गहतोड़ी का नाम जोड़कर उन्हें सम्मान देने का प्रयास किया जाएगा। डीएम के इस बयान के बाद क्षेत्रवासियों को अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होने की उम्मीद जगी है।
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