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नाबालिग बहन से दुष्कर्म के दोषी भाई को 25 साल की कठोर सजा, कोर्ट की सख्त टिप्पणी तुझ पर उठी हर निगाह का अस्तित्व मैं मिटा दूंगा
चंपावत, 28 मई:
चंपावत जिले में रिश्तों को कलंकित करने वाले एक जघन्य अपराध में विशेष सत्र न्यायाधीश अनुज कुमार संगल की अदालत ने नाबालिग बहन से दुष्कर्म के दोषी 23 वर्षीय युवक को 25 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने टिप्पणी में कहा,तुझ पर उठी हर निगाह का अस्तित्व मैं मिटा दूंगा... जो कि इस अपराध की गंभीरता को दर्शाती है।
कोर्ट ने दोषी पर पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में उसे दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही, पीड़िता के गर्भवती होने की जानकारी छुपाने के मामले में टनकपुर के तुषार अस्पताल को भी अदालत ने आड़े हाथों लिया और पॉक्सो की धारा 19 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने व जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए।
पीड़िता ने जन्म दिया नवजात शिशु
अभियोजन पक्ष के अनुसार, क्षेत्र की 17 वर्षीय नाबालिग पीड़िता ने 29 जनवरी 2024 को टनकपुर के एक निजी अस्पताल में नवजात शिशु को जन्म दिया। प्रसव से 10 दिन पहले जब पेट में दर्द की शिकायत पर पीड़िता को अस्पताल लाया गया तो उसकी मां को गर्भावस्था की जानकारी मिली। पूछताछ में किशोरी ने बताया कि उसके बड़े भाई ने जबरन शारीरिक संबंध बनाए जिससे वह गर्भवती हुई। शर्म और डर के कारण परिवार चुप रहा, लेकिन प्रसव के बाद पिता ने साहस दिखाते हुए पुलिस में मामला दर्ज कराया।
डीएनए जांच से हुई पुष्टि, 7 गवाहों और 27 साक्ष्यों से दोष साबित
पुलिस ने 30 जनवरी को आरोपी को गिरफ्तार किया। डीएनए जांच में यह पुष्टि हो गई कि वही नवजात शिशु का पिता है। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 7 गवाह और 27 महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत किए। इन सभी के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई।
अस्पताल की चुप्पी पर अदालत सख्त
कोर्ट ने अस्पताल प्रबंधन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पीड़िता के साथ हुए यौन अपराध की जानकारी छुपाकर उन्होंने पॉक्सो एक्ट की धारा-19 का उल्लंघन किया है। अदालत ने अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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यह फैसला केवल एक सजा नहीं, बल्कि समाज को दिया गया कड़ा संदेश है कि यौन अपराध, वह भी अपने ही घर में, किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
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