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चम्पावत : लाखों की लागत से लगे सोलर हैंडपंप ने छोड़ा साथ, जिम्मेदार लापता
चंपावत।
ब्लॉक ऑफिस और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय के बीच लगे सोलर हैंडपंप ने अब स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। लाखों रुपये की लागत से लगाए गए इस सोलर हैंडपंप ने महज़ कुछ दिन ही काम किया, उसके बाद से यह पूरी तरह बंद पड़ा है।
हैरानी की बात यह है कि इस हैंडपंप को किस विभाग या एजेंसी ने लगाया, इसकी जानकारी तक लोगों को नहीं है। न कोई जानकारी बोर्ड लगा है, न ही कोई निगरानी या रखरखाव की व्यवस्था की गई है।
जल संकट गहराया
इस हैंडपंप पर आसपास के कई परिवार पानी के लिए पूरी तरह निर्भर थे औऱ आवागमन करने वाले लोग भी इस ही एकमात्र हैंड पंप में निर्भर है, यह हैंडपंप उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था। अब इसके बंद होने से बड़ी आबादी को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों की मांग
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से इस सोलर हैंडपंप को जल्द से जल्द दुरुस्त कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह क्षेत्रीय जरूरत का महत्वपूर्ण जलस्रोत था और इसे नजरअंदाज करना आम जनता के साथ अन्याय है।
रहस्यमयी ढंग से हुआ था इंस्टॉलेशन
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ लोग आए, हैंडपंप लगाया और चले गए। इसके बाद कभी कोई नजर नहीं आया। अब यह हैंडपंप केवल एक शोपीस बनकर रह गया है।
सवाल उठ रहे हैं:
किसने लगाया यह हैंडपंप?
देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है?
जब यह दफ्तरों के ठीक बीच में है तो निगरानी क्यों नहीं?
प्रशासन से अपील:
जनहित को देखते हुए हैंडपंप की मरम्मत कर इसे दोबारा चालू किया जाए और जिम्मेदार एजेंसी की पहचान कर भविष्य में रखरखाव की ठोस व्यवस्था की जाए।
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