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भिंगराड़ा की रामलीला में उमड़ा जनसैलाब, प्रवासी ग्रामीण भी निभा रहे भागीदारी
भिंगराड़ा की रामलीला में उमड़ा जनसैलाब, प्रवासी ग्रामीण भी निभा रहे भागीदारी
1967 से हो रहा आयोजन, धनुष यज्ञ के मंचन ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध; कलाकारों के अभिनय की हो रही सराहना
लोहाघाट। नधियाघाटी क्षेत्र के प्रमुख ग्रामीण कस्बे भिंगराड़ा में इन दिनों रामलीला की धूम मची हुई है। यहां रामलीला को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि गांव से पलायन कर चुके लोग भी नवरात्र के दौरान अपने घर लौटकर पूजा-पाठ के साथ रामलीला के आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले इस क्षेत्र में रामलीला का आयोजन नहीं होता था। गडियूरा गांव में 14 वर्षों तक रामलीला आयोजित किए जाने के बाद वर्ष 1967 में इसे भिंगराड़ा में शुरू किया गया। उस समय घाटी क्षेत्र के दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में लोग रामलीला देखने पहुंचते थे। आज आसपास के अन्य स्थानों पर भी रामलीला का मंचन होता है, लेकिन भिंगराड़ा की रामलीला के प्रति लोगों का उत्साह अब भी बरकरार है।
यहां तालीम मास्टर एवं शिक्षक कृष्ण चंद्र भट्ट कलाकारों को गायन, सुर, लय, ताल और अभिनय का विशेष अभ्यास कराते हैं। उनके मार्गदर्शन में कलाकार मंच पर अपने किरदारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। धनुष यज्ञ के मंचन के दौरान रामलीला स्थल पर दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी और कलाकारों के अभिनय को खूब सराहना मिली।
धनुष यज्ञ में श्रीराम की भूमिका किशोर भट्ट, लक्ष्मण की भूमिका ललित भट्ट, सीता की भूमिका मुकेश भट्ट, रावण की भूमिका हरीश भट्ट और परशुराम की भूमिका दिनेश भट्ट ने निभाई। कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया।
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष गिरीश चंद्र भट्ट ने बताया कि रामलीला के आयोजन से गांव के अधिकांश घरों में रौनक लौट आती है। यह आयोजन प्रवासी ग्रामीणों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण रामलीला के पात्रों से प्रेरणा लेकर उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करते हैं।
फोटो कैप्शन: भिंगराड़ा की रामलीला में धनुष यज्ञ के मंचन का मनमोहक दृश्य।