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चंपावत में पानी के लिए हाहाकार, क्वैरला पंपिंग योजना बनी सफेद हाथी
चंपावत, 17 जून – जिला मुख्यालय चंपावत में पेयजल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। करोड़ों की लागत से बनी क्वैरला पंपिंग योजना, जो नगरवासियों के लिए आशा की किरण थी, अब असफलता का प्रतीक बनती जा रही है। बीते 3-4 दिनों से नगर के अधिकांश हिस्सों में पानी की आपूर्ति ठप पड़ी है, जिससे आमजनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
लगभग 30 करोड़ 88 लाख की योजना, फिर भी जनता प्यासी
करीब 31 करोड़ की लागत से बनी इस योजना से उम्मीद थी कि वर्षों पुरानी पानी की समस्या से निजात मिलेगी, लेकिन तकनीकी खामियों, पाइपलाइन खराबी, फ़िल्टर सिस्टम के अभाव और प्रबंधन की लापरवाही ने इसे सफेद हाथी बना दिया है। नदी से आने वाला पानी अक्सर गंदा होने के कारण बिना फिल्टर के टैंकों में नहीं पहुंचाया जा रहा है।
हैंडपंपों के भरोसे गुजारा
नागनाथ, बालेश्वर वार्ड समेत कई क्षेत्रों में लोगों को हैंडपंपों से पानी भरकर अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ीं। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी लाइन में लगकर पानी भरते देखे गए। गर्मी के इस मौसम में यह संकट लोगों के लिए और भी कष्टकारी बन गया है।
क्या बोले अधिकारी?
जल संस्थान के कनिष्ठ अभियंता हेमंत फुलारा ने जानकारी दी कि क्वैरला पंपिंग योजना के स्रोत का पानी गंदा होने के कारण फिलहाल पानी लिफ्ट नहीं किया गया है। उनका कहना है कि मंगलवार से व्यवस्था सुचारू कर दी जाएगी।
स्थानीयों का फूटा गुस्सा, मांगी जांच
स्थानीय लोगों ने प्रबंधन पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बरसात के चलते पुराने स्रोतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध है, लेकिन विभागीय कर्मचारी क्वैरला योजना में इतने उलझे हुए हैं कि आपात स्थिति में पुरानी पाइपलाइनों को भी नहीं जोड़ पा रहे हैं।
नगरवासियों ने मांग की है कि–
पुराने जलस्रोतों को तत्काल चालू किया जाए
योजना की उच्चस्तरीय जांच हो
जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो
निष्कर्ष: जनता को चाहिए समाधान, नहीं सिर्फ आश्वासन
नगर में पानी की समस्या ने यह साबित कर दिया है कि सिर्फ बड़ी योजनाएं बनाना ही समाधान नहीं है, बल्कि उनकी कार्यान्वयन क्षमता और समय पर कार्रवाई ही असली राहत है। अब देखना यह होगा कि क्वैरला योजना सचमुच जनता की प्यास बुझा पाएगी या इसी तरह एक और विफल सरकारी योजना बनकर रह जाएगी।