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भावनाओं में भीगी विदाई: जिले के कर्मठ डीएम नवनीत पांडे को नम आंखों से दी गई विदाई, 22 माह की सेवा में आमजन से जोड़ा आत्मीय रिश्ता, मॉडल जिला की नींव रखने वाले प्रशासक का सम्मान
चंपावत।
जनपद चंपावत के इतिहास में 21 जून 2025 का दिन लंबे समय तक याद रखा जाएगा। जिले की तरक्की, सुशासन और आमजन के साथ सीधी संवाद शैली को प्रशासन में उतारने वाले जिलाधिकारी नवनीत पांडे जब विदाई समारोह में पहुंचे, तो हर आंख नम थी। अपने 22 माह 10 दिन के कार्यकाल में श्री पांडे ने जो आत्मीयता, संवेदनशीलता और निष्ठा से कार्य किया, उसने उन्हें जनता के दिलों में बसा दिया।
कार्य संस्कृति की बात करें तो नवनीत पांडे किसी भी फ़ाइल या कार्य को टालने में विश्वास नहीं रखते थे। अवकाश हो या त्योहार, वे जनता की समस्याओं के समाधान के लिए हमेशा उपलब्ध रहते। दूर-दराज के गांवों में जाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनना, खुद सड़क पर उतरकर निरीक्षण करना, और फरियादियों को सुकून देना – यही उनकी पहचान बन गई थी।
उन्हें लेकर जिले में यह आम धारणा बन गई थी कि जिस अधिकारी के कार्यकाल में पद की हनक नहीं, जनता से सीधे संवाद की परंपरा हो, वह सच्चा लोकसेवक होता है। शायद यही कारण रहा कि जब उनके स्थानांतरण की खबर आई, तो जिले में प्रतिक्रिया की लहर दौड़ गई। लोगों ने सोशल मीडिया, जनसभा और निजी चर्चाओं में स्पष्ट शब्दों में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं – मुख्यमंत्री धामी को इससे बेहतर डीएम कहां मिलेगा?
सिर्फ भावनाएं साथ ले गए
विदाई समारोह के दौरान श्री पांडे को कई स्मृति चिन्ह भेंट किए गए, लेकिन वे सब यही छोड़कर सिर्फ और सिर्फ लोगों की भावनाओं को अपने साथ ले गए। उन्होंने अपने भाषण में जिलेवासियों के प्रति गहरी कृतज्ञता जताई और कहा –
"मैं संतुष्ट हूं कि अधिकांश क्षेत्रों में मेरी उपस्थिति सार्थक रही, लेकिन कुछ गांवों में जाकर लोगों से मिलने का जो वादा किया था, वह अधूरा रह गया – उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं।"
ईमानदारी से ओतप्रोत पारिवारिक विरासत
श्री पांडे उस परिवार से आते हैं जहां कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और ऊँचे विचारों की मजबूत नींव रही है। यही मूल्य उनके कार्यकाल में स्पष्ट रूप से दिखे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि “सरकार हमें वेतन और सुविधाएं केवल कुर्सी पर बैठने के लिए नहीं, बल्कि गरीब व्यक्ति की सेवा के लिए देती है।” उनके यह शब्द उनके सेवा दर्शन को संपूर्ण रूप से अभिव्यक्त करते हैं।
विकास की गति को लेकर चिंता
स्थानीय लोगों की मानें तो नवनीत पांडे के स्थानांतरण से विकास की गति प्रभावित हो सकती है, क्योंकि नया अधिकारी जिले को समझने और उसकी कार्यपद्धति से सामंजस्य बैठाने में समय लेगा। पांडे ने अधिकारियों और जनता के बीच की दूरी को पाटने का जो मॉडल खड़ा किया, वह आने वाले समय के लिए एक मिसाल रहेगा।