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आवारा गौवंश अब होंगे गौशालाओं में सुरक्षित, प्रशासन ने शुरू की ठोस पहल, शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय, ग्रामीण क्षेत्रों में जिला पंचायत करेगी प्रबंधन
चंपावत, 26 जून 2025 (सू.वि.)
चंपावत जनपद में आवारा गौवंशीय पशुओं की समस्या के समाधान की दिशा में प्रशासन ने गंभीर पहल शुरू कर दी है। जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने इस संबंध में संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आवारा पशुओं के प्रबंधन की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए।
निर्देशों के अनुसार:
शहरी क्षेत्रों में आवारा गौवंश को पकड़कर नगर पालिका एवं नगर पंचायत द्वारा स्थानीय गौशालाओं तक पहुँचाया जाएगा।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह कार्य जिला पंचायत के माध्यम से संपादित किया जाएगा।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वसुंधरा गर्ब्याल ने जानकारी दी कि जनपद में संचालित गौशालाओं से संबंधित समस्त जानकारी उनके कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने बताया कि सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों को यह निर्देशित किया गया है कि वे नगर निकायों, पंचायतों और गौशाला संचालकों के साथ समन्वय बनाते हुए अपने क्षेत्र में आवारा गौवंशों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित रूप से गौशालाओं में पहुँचाएं।
इसके अतिरिक्त, सभी अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे दैनिक प्रगति रिपोर्ट मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को अनिवार्य रूप से प्रेषित करें, ताकि कार्यों की सतत निगरानी और मूल्यांकन किया जा सके।
जिन गौशालाओं को आवारा गौवंश के संरक्षण हेतु चिन्हित किया गया है, वे हैं:
माँ कामधेनु वात्सल्य सेवाधाम, लोहाघाट
श्री नित्य आश्रम गौसेवा समिति, कालाझाला, टनकपुर
गर्ग ऋषि गोसेवा समिति, किमाड, पाटी
माँ पूर्णागिरी गौसेवा समिति, गरसाड़ी, पाटी
भारद्वाज गोसेवा समिति, थापलागूंठ
जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने इस अभियान को जन सहभागिता से जोड़ने की अपील करते हुए कहा कि नागरिक भी यदि अपने क्षेत्र में आवारा गौवंश को लेकर जानकारी साझा करें, तो प्रशासन उनके संरक्षण में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।