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सीमावर्ती गांव लेटी में जैविक खेती और स्थानीय रोजगार से रुकेगा पलायन - डॉ लखेड़ा, सीमा के लोग हमारी बिन वर्दी की सुरक्षा दीवार हैं - नेपाल सीमा क्षेत्र में पलायन पर अध्ययन के दौरान दिया सुझाव
लोहाघाट (चंपावत), 26 जून 2025:
नेपाल सीमा से सटा लोहाघाट ब्लॉक का अंतिम गांव लेटी विकास की बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर है, लेकिन यहां के लोग आज भी अपनी माटी से गहरा लगाव रखते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र में पलायन की स्थिति का अध्ययन करने पहुंचे राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लोहाघाट के समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ प्रकाश लखेड़ा ने गांव के लोगों से संवाद करते हुए क्षेत्र की संभावनाओं व चुनौतियों को जाना।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देकर ही पलायन की प्रवृत्ति को रोका जा सकता है। लेटी जैसे गांवों में पारंपरिक जैविक खेती, बागवानी, फल-फूल उत्पादन और मौनपालन की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें आधुनिक विज्ञान व तकनीक से जोड़कर स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
डॉ लखेड़ा ने यह भी कहा कि सीमा पर रहने वाले नागरिक मात्र ग्रामीण नहीं, बल्कि बिन वर्दी के रक्षक हैं जो हर गतिविधि पर सतत निगाह रखते हैं। ऐसे क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार जैसी आधारभूत सुविधाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
कृषि और संस्कृति की विशेषताएं:
यहां जैविक पद्धति से पपीता, आम, कटहल, कड़ी पत्ता, सिट्रस फल आदि का उत्पादन होता है, जिनका स्वाद और गुणवत्ता विशेष है।
लागत कम होने के बावजूद बाजार की पहुंच ना होने के कारण किसान परेशान हैं।
नेपाल से रोटी-बेटी के संबंध होने के कारण यहां की संस्कृति में भी खास समावेश देखने को मिलता है।
सड़कों और सुविधाओं की स्थिति खराब:
स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव की सड़कें, पुल और सिंचाई की नहरें टूटी हुई हैं। उनकी तुलना में नेपाल की सड़कें आज भारत से बेहतर स्थिति में हैं, जिससे वे स्वयं को पिछड़ा हुआ महसूस करते हैं।
युवाओं को स्वामी विवेकानंद से जोड़ा:
डॉ लखेड़ा ने गांव के युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों से जोड़ते हुए उन्हें नशे से दूर रहने और सामाजिक नेतृत्व में आगे आने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को स्वामी विवेकानंद की प्रतिमाएं भेंट कीं।
तस्वीरें:
सीमावर्ती ग्रामीणों के साथ बातचीत करते डॉ लखेड़ा
वीरान पड़े पुश्तैनी मकानों की तस्वीरें, जो पलायन की कहानी बयां करती हैं
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