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डिप्लोमा इंजीनियर्स की सरकार को चेतावनी, 27 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा।
देहरादून -उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के द्वादश द्विवार्षिक महाधिवेशन के दौरान प्रदेशभर से पहुंचे इंजीनियरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। महासंघ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को 27 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपते हुए शीघ्र समाधान की मांग की है।
महासंघ द्वारा सौंपे गए मांग-पत्र में वेतन विसंगति, पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, पदोन्नति में सुधार और सेवा शर्तों से जुड़े कई अहम मुद्दे शामिल हैं। इंजीनियरों ने कहा कि लंबे समय से उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है, जिससे संवर्ग में भारी असंतोष व्याप्त है।
वेतन विसंगति बना बड़ा मुद्दा
महासंघ ने कनिष्ठ अभियंताओं (JE) के लिए ₹4600 ग्रेड पे को 01 जनवरी 2006 से काल्पनिक आधार पर लागू करने की मांग उठाई है, ताकि ड्राफ्ट्समैन और जेई के वेतन में असमानता समाप्त हो सके।
OPS बहाली पर जोर
इंजीनियरों ने NPS और UPS के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू करने की मांग को प्रमुख मुद्दा बताया।
पदोन्नति और ACP की मांग
महासंघ ने सेवाकाल में कम से कम तीन पदोन्नतियां सुनिश्चित करने या 10, 16 और 26 वर्ष की सेवा पर उच्च ग्रेड पे (₹5400, ₹6600, ₹8700) देने की मांग की।
गैर-तकनीकी कार्यों पर जताई नाराजगी
इंजीनियरों ने आरोप लगाया कि उन्हें कांवड़ मेला, चारधाम यात्रा और परीक्षा ड्यूटी जैसे गैर-तकनीकी कार्यों में लगाया जाता है, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने इन कार्यों से मुक्त करने की मांग की।
सुरक्षा और सुविधाओं की मांग
दुर्गम क्षेत्रों और आपदा कार्यों में लगे इंजीनियरों के लिए ₹2 करोड़ तक का सामूहिक दुर्घटना बीमा, बायोमेट्रिक उपस्थिति से छूट, जल संस्थान व जल निगम के एकीकरण और नए इंजीनियरों को लैपटॉप उपलब्ध कराने जैसी मांगें भी शामिल हैं।
महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि इंजीनियर राज्य के विकास की रीढ़ हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान में देरी से कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।