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पाइपलाइन का काम अधर में, प्यासा नगर और गुस्से में व्यापारी
जनपद पिथौरागढ़ | गंगोलीहाट
विकास की योजनाएं जब लापरवाही की भेंट चढ़ती हैं, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरना तय हो जाता है। ऐसा ही हाल इन दिनों गंगोलीहाट नगर का है, जहां नई पेयजल योजना का कार्य पिछले एक महीने से ठप पड़ा हुआ है। इससे नाराज नगर उद्योग व्यापार मंडल ने विभाग को दो-टूक चेतावनी देते हुए जल्द काम शुरू न होने पर आंदोलन की बात कही है।
क्या है पूरा मामला
नगर के हाट, भल्यूड़ा, डोलिया और पठकयूड़ा क्षेत्रों में बिछाई जा रही पाइपलाइन को नेशनल हाईवे (गोदाम रोड से चौराहे तक) जोड़ना था, लेकिन ठेकेदार द्वारा कार्य बीच में ही रोक दिए जाने से पूरी योजना अधूरी पड़ी है।
ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप
व्यापारियों का आरोप है कि करीब एक महीने पहले ठेकेदार ने काम बंद कर दिया, जिससे करोड़ों की इस योजना का लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। नगर में पेयजल संकट गहराने लगा है और लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
व्यापार मंडल की चेतावनी
नगर उद्योग व्यापार मंडल ने साफ कहा है-
“जनता के धैर्य की परीक्षा न ली जाए। यदि जल्द ही पाइपलाइन जोड़ने का कार्य शुरू नहीं हुआ, तो व्यापारी और नगरवासी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”
ज्ञापन देने वालों में हितेश खाती (अध्यक्ष), मनीष बिष्ट (महासचिव), किशन भंडारी (संरक्षक), प्रदीप पंत (जिला महामंत्री), यशवंत सिंह, पूर्व प्रधान शंकर लाल चौधरी, मनोज कुमार सहित कई व्यापारी और स्थानीय लोग शामिल रहे।
विभाग का पक्ष
अपर सहायक अभियंता रूपेश आर्या के अनुसार, पाइपलाइन कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा था। संबंधित ठेकेदार को फरवरी में एक नोटिस और 24 मार्च को दूसरा नोटिस जारी किया गया है, लेकिन अब तक न तो सुधार हुआ है और न ही कोई जवाब मिला है।
अधिशासी अभियंता सुरेश जोशी ने बताया कि योजना के तहत पाइपलाइन को मानकों के अनुसार डेढ़ फीट गहराई तक डलवाया जाएगा। यदि ठेकेदार निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।
सवालों के घेरे में सिस्टम
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि ठेकेदार को अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते वह मानकों की अनदेखी कर रहा है।
171 लाख की योजना अधर में
बताया जा रहा है कि इस पेयजल योजना की कुल लागत करीब 171 लाख रुपये है, लेकिन इसके बावजूद नगरवासियों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
अब सबकी नजर प्रशासन पर है कि वह इस समस्या का समाधान कब तक करता है।
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