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महाष्टमी पर मां हाट कालिका के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, जयकारों से गूंजी गंगोलीहाट की घाटी।
गंगोलीहाट। हाट कालिका मंदिर में चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी पर श्रद्धा और भक्ति का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। तड़के सुबह चार बजे से ही मंदिर परिसर भक्तों के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। मुख्य पुरोहित दीप पंत ने ब्रह्ममुहूर्त में माता का भव्य पंचामृताभिषेक कर विधिवत पूजा-अर्चना और श्रृंगार संपन्न किया, जिसके बाद श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ।
दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों सहित देश के विभिन्न कोनों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने घंटों लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार किया और माता के चरणों में मत्था टेककर सुख-समृद्धि की कामना की। आस्था के इस महापर्व पर पलायन का दंश झेल रहे स्थानीय गांवों के लोग भी बड़ी संख्या में अपनी जड़ों की ओर लौटे और मंदिर की धर्मशाला में सामूहिक कन्या पूजन का क्रम लगातार चलता रहा।
कुमाऊं रेजिमेंट की आराध्य देवी होने के चलते सेना के जवानों ने भी विशेष उपस्थिति दर्ज कराई और सैनिक गेस्ट हाउस में विशाल भंडारे का आयोजन किया। इसके अलावा मंदिर परिसर के विभिन्न स्थानों और मुख्य बाजार स्थित पुराने बस अड्डे पर भी भंडारे आयोजित हुए, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
दिनभर मंदिर के पुरोहितों एवं विद्वान पंडितों द्वारा विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न कराए गए। वहीं हाट कालिका के साथ-साथ क्षेत्र के चामुण्डा, अंबिका और वैष्णवी मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने बाजार में लगे पारंपरिक अष्टमी मेले का भी आनंद लिया।
पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी के चलते भारी भीड़ के बावजूद पूरे क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनी रही और यातायात सुचारू रूप से संचालित होता रहा। दिन चढ़ने के साथ ही मेले की रौनक और माता के दरबार की भव्यता देखते ही बन रही थी।
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