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विश्व प्रसिद्ध मां हाट कालिका मंदिर में शुरू हुई चातुर्मास साधना, चार माह तक कठोर तप में लीन रहेंगे तीर्थ पुरोहित
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विश्व प्रसिद्ध मां हाट कालिका मंदिर में शुरू हुई चातुर्मास साधना, चार माह तक कठोर तप में लीन रहेंगे तीर्थ पुरोहित
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गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। विश्व प्रसिद्ध मां हाट कालिका मंदिर में सदियों पुरानी चातुर्मास साधना की पावन परंपरा इस वर्ष भी श्रद्धा, आस्था और कठोर नियमों के साथ प्रारंभ हो गई है। इस वर्ष इस प्राचीन साधना का निर्वहन करने का सौभाग्य तीर्थ पुरोहित पंकज पंत को प्राप्त हुआ है, जो देवशयनी एकादशी से चार माह की कठिन तपस्या में लीन हैं।
चातुर्मास साधना अपनी कठिन दिनचर्या और कठोर अनुशासन के लिए जानी जाती है। साधना के दौरान तपस्वी चार महीनों तक मंदिर परिसर की सीमा नहीं छोड़ते। वे प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में सुबह 4 बजे मां हाट कालिका का दिव्य स्नान और श्रृंगार कर पूजा-अर्चना से दिन की शुरुआत करते हैं। दिनभर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की पूजा संपन्न कराने के बाद संध्या समय पुनः स्नान, गर्भगृह की विशेष पूजा, आरती और माता के शयन विधान के उपरांत ही स्वयं अपने हाथों से तैयार भोजन दिन में केवल एक बार ग्रहण करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास में की गई तपस्या का फल अनेक गुना अधिक प्राप्त होता है। इसी क्रम में पवित्र श्रावण मास के दौरान बारीदार रावल परिवारों की ओर से मां हाट कालिका को प्रतिदिन खीर का विशेष भोग अर्पित किया जा रहा है। इस दिव्य प्रसाद को ग्रहण करने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं।
चार माह तक चलने वाली यह अलौकिक साधना कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी को विशाल पारायण और महाभंडारे के साथ संपन्न होगी।