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विधायक के आरोपों को किया खारिज। प्रूफ दो वरना माफी मांगो।
विम्मी जोशी के पीछे चट्टान की तरह खड़ी हुई महिलाएं। कहां मैडम को सर्टिफिकेट हम देंगे नेता नहीं।समर्थन में कलेक्ट्रेट मैं गरजी महिलाएं, कथित अपमानजनक व्यवहार पर जताया आक्रोश।
चंपावत। अधिकारियों के खिलाफ धरना देकर पंचायत प्रतिनिधियों को परेशान करने और विकास कार्यों में कमीशन लेने जैसे आरोप लगाने वाले लोहाघाट विधायक खुशाल सिंह अधिकारी को शनिवार को महिला समूहों की महिलाओं के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। उप परियोजना निदेशक (एपीडी) विम्मी जोशी के साथ विधायक के धरने के दौरान कथित दुर्व्यवहार से नाराज महिलाएं कलेक्ट्रेट पहुंचीं और प्रदर्शन कर अपना आक्रोश जताया। महिलाओं ने साफ कहा कि अधिकारी पर आरोप लगाए हैं तो प्रमाण भी सामने रखें, प्रमाण नहीं हैं तो सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
अंजली जोशी, ओम क्लस्टर की माया महर, धूराकी की मनीषा, मोदी की सरस्वती और सिमलटा की रेखा ठाकुर के नेतृत्व में पहुंचीं महिलाओं ने कहा कि विम्मी जोशी के प्रयासों से महिला समूहों को रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है। महिलाओं के अनुसार आज समूहों से जुड़ी महिलाएं होमस्टे, नमकीन-बेकरी, कैंटीन सहित कई स्वरोजगार गतिविधियां चला रही हैं। महिलाओं ने कहा कि जिस अधिकारी की कार्यशैली से महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं, उसी अधिकारी को आरोपों के कटघरे में खड़ा करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस अधिकारी के कार्य व्यवहार का सर्टिफिकेट महिलाएं देगी नेट नहीं।
महिलाओं ने कहा कि उनकी नजर में विम्मी जोशी ईमानदार और दूरदर्शी अधिकारी हैं। उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर विधायक को प्रमाण सार्वजनिक करने चाहिए। महिलाओं ने कहा कि यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो सार्वजनिक रूप से माफी मांगना ही नैतिकता का तकाजा है।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने कहा कि मुख्यमंत्री के मॉडल जिला चंपावत के अभियान को सफल बनाने के लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार और प्रशासनिक अधिकारी लगातार प्रयास कर रहे हैं। महिला समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करना इसी प्रयास का हिस्सा है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों को विकास कार्यों में सहयोग और समन्वय की भूमिका निभानी चाहिए। जिससे जनपद का तेजी से विकास किया जा सके।
महिलाएं बाद में जिलाधिकारी से मिलीं। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने उन्हें शांत करते हुए कहा कि महिला समूहों ने सशक्तिकरण का अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है और उनके प्रयासों से अन्य जिलों की महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं। जिलाधिकारी की अपील पर महिलाओं ने प्रदर्शन समाप्त किया, लेकिन अपना रुख स्पष्ट रखा।
महिलाओं ने दो टूक कहा कि आरोप सार्वजनिक हैं तो प्रमाण भी सार्वजनिक होने चाहिए। प्रमाण नहीं हैं तो माफी भी सार्वजनिक होनी चाहिए। कलेक्ट्रेट में महिला समूहों के इस प्रदर्शन ने अधिकारियों के खिलाफ चल रहे विवाद को नया मोड़ दे दिया है।
फोटो_कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करतीं महिला समूहों की महिलाएं, एपीडी विम्मी जोशी के समर्थन में विधायक के आरोपों पर जताया आक्रोश।