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विशेष न्यायालयों में प्रभावी पैरवी के लिए अभियोजकों के कार्यों का विभाजन।
दीपा रानी को विशेष लोक अभियोजक की जिम्मेदारी, पॉक्सो, एससी/एसटी, भ्रष्टाचार और एनडीपीएस मामलों की करेंगी पैरवी
चम्पावत, 07 सितम्बर 2026। जनपद चम्पावत में विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की नियमित एवं प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार ने अभियोजकों के कार्यों का स्पष्ट विभाजन किया है। इसके साथ ही 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुकी लोक अभियोजक दीपा रानी को विशेष लोक अभियोजक नामित किया गया है।
उत्तराखंड शासन के गृह अनुभाग-3 द्वारा जारी निर्देशों के क्रम में की गई इस व्यवस्था का उद्देश्य पॉक्सो, एससी/एसटी, भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और एनडीपीएस अधिनियम जैसे गंभीर एवं विशेष मामलों में सरकारी पक्ष की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना है। साथ ही किसी अभियोजक के अवकाश या जनपद से बाहर रहने की स्थिति में भी न्यायालयी कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए लिंक अभियोजकों की व्यवस्था की गई है।
आदेश के अनुसार जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) विद्याधर जोशी भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत सत्र परीक्षण वादों की पैरवी करेंगे। इसके अतिरिक्त थाना टनकपुर और थाना बनबसा से संबंधित एनडीपीएस अधिनियम के मामलों की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई है।
लोक अभियोजक/विशेष लोक अभियोजक दीपा रानी पॉक्सो, एससी/एसटी अधिनियम, भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम एवं अन्य विशेष न्यायालयों से संबंधित मामलों की पैरवी करेंगी। इसके साथ ही कोतवाली चम्पावत और थाना लोहाघाट के एनडीपीएस मामलों की जिम्मेदारी भी उनके पास रहेगी।
वहीं सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी)/विशेष लोक पॉक्सो अभियोजक कुन्दन सिंह भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत सत्र परीक्षण वादों के साथ थाना पाटी, कोतवाली पंचेश्वर, थाना रीठा और थाना तामली से संबंधित एनडीपीएस अधिनियम के मामलों की पैरवी करेंगे।
लिंक अभियोजकों की भी व्यवस्था
अभियोजन कार्य में निरंतरता बनाए रखने के लिए लिंक अभियोजकों की व्यवस्था की गई है। विद्याधर जोशी और कुन्दन सिंह एक-दूसरे के लिंक अभियोजक होंगे, जबकि दीपा रानी के लिंक अभियोजक कुन्दन सिंह होंगे। किसी अभियोजक के अवकाश पर रहने अथवा जनपद से बाहर होने की स्थिति में लिंक अभियोजक संबंधित मामलों में सरकारी पक्ष की पैरवी करेंगे।
जिलाधिकारी के इस आदेश से विशेष और गंभीर मामलों में अभियोजन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। जिम्मेदारियां स्पष्ट होने से मामलों की नियमित सुनवाई, आवश्यक तथ्यों और साक्ष्यों को समय पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने तथा अभियोजन कार्य में निरंतरता बनाए रखने में सुविधा होगी।
विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से जुड़े मामलों सहित अन्य गंभीर प्रकरणों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने की दिशा में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।