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क्षमता से अधिक गौवंश को मिला आश्रय, चम्पावत में 1002 निराश्रित गौवंश संरक्षित।
चम्पावत, 09 सितम्बर 2026। ‘आदर्श चम्पावत’ की संकल्पना के तहत जिले में आवारा एवं निराश्रित गौवंश के संरक्षण और देखभाल के लिए चलाए जा रहे अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अगस्त 2026 तक जिले में कुल 1002 निराश्रित गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जा चुका है।
मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. वसुंधरा गर्ब्याल ने बताया कि वर्ष 2023-24 से जनपद में 919 निराश्रित गौवंश के संरक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष अब तक 1002 गौवंश का संरक्षण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य से 83 अधिक है।
जिले की पांच प्रमुख गौशालाओं की कुल स्वीकृत क्षमता 750 गौवंश की है, जबकि वर्तमान में इनमें 1002 गौवंश को संरक्षण दिया जा रहा है। क्षमता से अधिक गौवंश होने के बावजूद पशुपालन विभाग और गौशाला समितियों द्वारा उनके चारे, स्वास्थ्य परीक्षण और देखभाल की व्यवस्था की जा रही है।
मां कामधेनु वात्सल्य सेवाधाम लोहाघाट में 225 की क्षमता के मुकाबले 375 गौवंश, श्री नित्य आश्रम गौसेवा समिति कालाझाला टनकपुर में 200 की क्षमता के मुकाबले 260, मां पूर्णागिरी गौसेवा समिति गरसाड़ी पाटी में 75 की क्षमता के मुकाबले 98, भारद्वाज गो सेवा समिति थापलागूंठ पाटी में 50 की क्षमता के मुकाबले 76 तथा गर्ग ऋषि गोसेवा समिति किमाड पाटी में 200 की क्षमता के मुकाबले 193 गौवंश संरक्षित हैं।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘आदर्श चम्पावत’ के विजन के अनुरूप जिले में कोई भी गौवंश सड़कों पर बेसहारा न घूमे, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गौवंश के संरक्षण के साथ सड़कों पर आवागमन को सुरक्षित बनाने और कृषि फसलों को आवारा पशुओं से बचाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग द्वारा गौ-संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने तथा निराश्रित गौवंश को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है।
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