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भटके हुए मनोरोगीयो की शरण स्थाली है श्रद्धा पुनर्वास केंद्र कर्जत।
श्रद्धा फाउंडेशन द्वारा भारत के रास्तो पर घुमने वाले मनोरोगियों को रास्ते से उठाकर संस्था मैं इलाज करके फिर पूरे भारत मैं जहाँ कहीं का हो उसे घर पहुंचता है ,इसी तरह आज संजय राम गांव जजुट तहसील गंगोलीहाट जिला पिथौरागढ़ उत्तराखंड के निवासी है । परिवार वालों से बात करके हमें पता चला की पहले वह बरेली में एक पेट्रोल पंप पर काम करते थे लेकिन वहां पर गांजा पीने की आदत लग गई उसके बाद इसकी मानसिक स्थिति खराब हो गई जिसके कारण वह वहां से निकल गया भटकते भटकते यह नेपाल मैं पहुंच गए नेपाल के मानव सेवा आश्रम चितवन भरतपुर से इनको मुंबई करजत में श्रद्धा रिहैबिलिटेशन सेंटर में लाया गया और वहां पर उनके दिमाग का इलाज और पुनर्वास के लिए श्रद्धा फाउंडेशन कर्जत मुंबई ट्रांसफर किया !
उपचार के बाद धीरे धीरे इसकी मानसिक स्थिति मैं सुधार आया और इसने अपना पता बताया
संस्था के सोशल वर्कर स्वरूप कुमार उसे लेकर उसके गांव जजुट ब्लॉक गंगोलीघाट तहसील पिथौरागढ़ उत्तराखंड में लाए और उसके परिवार वालों का पता किया।और उसके परिवार वालों को संजय राम के बारे मैं जानकारी मिली तो वो लोग काफी खुश हुए । संजय के भाई ने बताया कि संजय पिछले लगभग 20 सालों से अपने घर से लापता था
परिवार वालों ने श्रद्धा संस्था का बहुत आभार व्यक्त किया। संजय राम के घर का पता ढूंढने में ग्राम पंचायत के प्रधान श्रीमती मंजू देवी ने भी सहायता की ।
स्वरूप कुमार ने बताया की संस्था 1988 से चल रहीं है और संस्था के फाउंडर डाक्टर भरत वाटवानी और उनकी पत्नी स्मिता वाटवानी की देखरेख मैं अभी तक लगभग 14500 लोगों को ठीक कर के घर पहुंचाया है , समाज सेवा के क्षेत्र में डॉक्टर भरत वाटवानी सर को 2018 मैं " रेमन मैग्सेसे पुरस्कार" से सम्मानित किया गया!
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